प्यासी बहु, ठरकी ससुर और गधे का लंड भाग -3

Sasur bahu xxx sex story:- बहु! बहु! सो गयी क्या?” कोई जबाब नहीं. अब रामलाल ने धीरे से कँचन को हिलाया. अब भी बहु ने कोई हरकत नहीं की. रामलाल को यकीन हो गया की नींद की गोली ने अपना काम कर दिया है. कंचन आँखें बंद किये पड़ी हुई थी. अब रामलाल की हिम्मत बढ़ गयी. वो बहु की कच्छी को उठा के सूघने लगा. बहु की कच्छी की गंध ने उसे मदहोश कर दिया. सारा दिन पहनी हुई कच्छी में चूत पेशाब और शायद बहु की चूत के रूस की मिलीजुली खुशबू थी. लौड़ा बुरी तरह से फनफनाया हुआ था. रामलाल ने बहु की कच्छी को जी भर के छुआ और उसकी मादक गंध का आनंद लिया. अब रामलाल पेट के बल पड़ी हुई बहु के पैरों की तरफ आ गया. बहु की अल्हढ़ जवानी अब उसके सामने थी. रामलाल ने धीरे धीरे बहु के पेटीकोट को ऊपर की ओर सरकाना शुरू कर दिया. थोड़ी ही देर में पेटीकोट बहु की कमर तक ऊपर उठ चुका था. सामने का नज़ारा देख के रामलाल की ऑंखें फटी रह गयी. बहु कमर से नीचे बिलकुल नंगी थी. आज तक उसने इतना खूबसूरत नज़ारा नहीं देखा था.

इस कहानी के पहले पार्ट अगर आपने नहीं पढे है तो आप यहाँ पढ़ सकते है ==>> प्यासी बहु, ठरकी ससुर और गधे का लंड भाग -2

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बहु के गोरे गोरे मोटे मोटे फैले हुए चूतड़, बाहर से आती हुई भीनी भीनी रौशनी में बहुत ही जानलेवा लग रहे थे. रामलाल अपनी ज़िन्दगी में कई औरतों को चोद चुका था लेकिन आज तक इतनी सेक्सी गांड किसी भी औरत की नहीं थी. रामलाल मन ही मन सोचने लगा की अगर ऐसी औरत उसे मिल जाए तो वो ज़िन्दगी भर उसकी गांड ही मारता रहे. लेकिन ऐसी किस्मत उसकी कहाँ? आज तक उसने किसी औरत की गांड नहीं मारी थी. मारने की तो बहुत कोशिश की थी लेकिन उसके गधे जैसे लंड को देख कर किसी औरत की हिम्मत ही नहीं हुई. पता नहीं बेटा बहु की गांड मारता है कि नहीं रामलाल ने मन ही मन सोचा. उधर कंचन का भी बुरा हाल था. उसने खेल तो शुरू कर दिया लेकिन अब उसे बहुत शर्म आ रही थी और थोड़ा डर भी लग रहा था.. हालांकि एक बार पहले वो ससुर जी को अपने नंगे बदन के दर्शन करा चुकी थी लेकिन उस वक़्त ससुर जी बहुत दूर थे. आज तो ससुर जी अपने हाथों से उसे नंगी कर रहे थे. फैली हुई टांगों के बीच से चूत के घने बालों की झलक मिल रही थी. रामलाल ने बहुत ही हलके से बहु के नंगे चूतड़ों पे हाथ फेरना शुरू कर दिया. कंचन के दिल की धड़कन तेज़ होने लगी. रामलाल ने हलके से एक उंगली कंचन के चूतड़ों की दरार में फिरा दी. लेकिन कंचन जिस मुद्रा में लेटी हुई थी उस मुद्रा में उसकी गांड का छेड़ दोनोचोटों के बीच बून्द था. आखिर कंचन एक औरत थी. एक मरद कहाथ उसके नंगे चूतड़ों को सहला रहा था. अब उसकी चूत भी गीली होने लगी.

अभी तक कंचन अपनी दोनों टांगें सीधी लेकिन थोरीचौरि करके पेट के बल लेटी हुई थी.. ससुर जी को अपनी चूत की झलक और अच्छी तरह देने के लिए अब उसने एक टांग मोड के ऊपर कर ली. ऐसा करने से अब कंचन की चूत उसकी टांगों के बीच में से साफ़ नज़र आने लगी. बिलकुल साफ़ तो नहीं कहेंगे लेकिन जितनी साफ उस भीनी भीनी रौशनी में नज़र आ सकती थी उतनी साफ़ नज़र आ रही थी. गोरी गोरी मांसल जाँघों के बीच घनी और लम्बी लम्बी झांटों से ढकी बहु की खूब फूली हुई चूत देख के रामलाल की लार टपकने लगी. हालांकि गांड का छेद अब भी नज़र नहीं आ रहा था. रामलाल ने नीचे झुक के अपना मुंह बहु की जाँघों के बीच डाल दिया. बहु की झांटों के बाल उसकी नाक और होंठों से टच कर रहे थे. अब कुत्ते की तरह वो बहु की चूत सूंघने लगा. कंचन की चूत काफी गीली हो चुकी थी और अब उसमे से बहुत मादक खूशबू आ रही थी. आज तक तो रामलाल बहु की पैंटी सूंघ कर ही काम चला रहा था लेकिन आज उसे पता चला की बहु की चूत की गंध में क्या जादू है. रामलाल को ये भी अच्छी तरह समझ आ गया कि कोई कुत्ता कुतिया को चोदने से पहले उसकी चूत क्यों सूँघता है. रामलाल ने हिम्मत करके हलके से बहु की चूत को चूम लिया. कंचन इस के लिए तैयार नहीं थी, जैसे ही रामलाल के होंठ उसकी चूत पे लगे वो हड्बड़ा गयी. रामलाल झट से चारपाई के नीचे छुप गया. Sasur bahu xxx sex story

कंचन अब सीधी हो कर पीठ के बल लेट गयी लेकिन अपना पेटीकोट जो की कमर तक उठ चुका था नीचे करने की कोई कोशिश नहीं की. रामलाल को लगा की बहु फिर सो गयी है तो वो फिर चारपाई के नीचे से बाहर निकला. बाहर निकल के जो नज़ारा उसके सामने था उसे देख के वो दंग रह गया. बहु अब पीठ के बल पड़ी हुई थी. पेटीकोट पेट तक ऊपर था और उसकी चूत बिलकुल नंगी थी. रामलाल बहु की चूत देखता ही रहा गया. घने काले लम्बे लम्बे बालों से बहु की चूत पूरी तरह ढकी हुई थी. बाल उसकी नाभि से करीब तीन इंच नीचे से ही शुरु हो जाते थे. रामलाल ने आज तक किसी औरत की चूत पे इतने लंबे और घने बाल नहीं देखे थे. पूरा जंगल ऊगा रखा था बहू ने. ऐसा लग रहा था मानो ये घने बाल बुरी नज़रों से बहु की चूत की रक्षा कर रहे हों. अब रामलाल की हिम्मत नहीं हुई की वो बहु की चूत को सहला सके क्योंकि बहु पीठ के बल पड़ी हुई थी और अब अगर उसकी आँख खुली तो वो रामलाल को देख लेगी. बहु के होंठ थोड़े थोड़े खुले हुए थे. रामलाल बहु के उन गुलाबी होंठों को चूसना चाहता था लेकिन ऐसा कर पाना मुश्किल था. फिर अचानक रामलाल के दिमाग में एक प्लान आया. उसने बहु का पेटीकोट धीरे से नीचे करके उसकी नंगी चूत को ढक दिया. अब उसने अपना फनफनाया हुआ लौड़ा अपनी धोति से बाहर निकाला और धीरे से बहु के खुले हुए गुलाबी होंठों के बीच टिका दिया.

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कंचन को एक सेकंड के लिए समझ नहीं आया की उसक होंठो के बीच ये गरम गरम ससुर जी ने क्या रख दिया लेकिन अगले ही पल वो समझ गयी की उसके होंठों के बीच ससुर जी का तना हुआ लंड है. मरद के लंड का टेस्ट वो अच्छी तरह पहचानती थी. अपने देवर का लंड वो न जाने कितनी बार चूस चुकी थी. वो एक बार फिर हड्बड़ा गयी लेकिन इस बार बहुत कोशिश करके वो बिना हिले आंखें बंद किये पड़ी रही. ससुर जी के लंड के सुपाड़े से निकले हुए रस ने कंचन के होंठों को गीला कर दिया. कंचन के होंठ थोड़े और खुल गये. रामलाल ने देखा की बहु अब भी गहरी नींद में है तो उसकी हिम्मत और बढ़ गयी. बहु के होंठों की गर्मी से उसका लंड बहु के मुंह में घुसने को उतावला हो रहा था. रामलाल ने बहुत धीरे से बहु के होंठों पे अपने लंड का दबाव बढ़ाना शुरू किया. लेकिन लंड बहुत मोटा था, मुंह में लेने के लिए कंचन को पूरा मुंह खोलना पड़ता. रामलाल ने अब अपना लंड बहु के होंठों पे रगड़ना शुरू कर दिया और साथ में उसके मुंह में भी घुसेड़ने की कोशिश करने लगा. रामलाल के लंड का सुपाड़ा बहु के थूक से गीला हो चुका था. कंचन की चूत बुरी तरह गीली हो गयी थी. उसका अपने ऊपर कण्ट्रोल टूट रहा था. उसका दिल कर रहा था की मुंह खोल के ससुर जी के लंड का सुपाड़ा मुंह में ले ले. Sasur bahu xxx sex story

अब नाटक खतम करने का वक़्त आ गया था. कंचन ने ऐसा नाटक किया जैसे उसकी नींद खुल रही हो. रामलाल तो इसके लिए तैयार था ही. उसने झट से लंड धोती में कर लिया. बहू का पेटीकोट तो पहले ही ठीक कर दिया था. कंचन ने धीरे धीरे आँखें खोली और ससुर जी को देख कर हड्बड़ा के उठके बैठने का नाटक किया. वो घबराते हुए अपने अस्त व्यस्त कपड़े ठीक करते हुए बोली…

कंचन – पिता जी….अआप..! यहां क्या कर रहे हैं?

रामलाल – घबराओ नहीं बेटी हम तो देखने आए थे की कहीं तुम्हारी तबीयत और ज़्यादा तो खराब नहीं हो गयी. कैसा लग रहा है अब?

रामलाल बहू के माथे पे हाथ रखता हुआ बोला जैसे सचमुच बहु का बुखार चेक कर रहा हो. कंचन के ब्लाउज के तीन हुक खुले हुए थे.

वो अपनी चूचिओं को ढकते हुए बोली जी.. मैं अब बिलकुल ठीक हूँ. नींद की गोलियां खा के अच्छी नींद आ गयी थी. लेकिन आप इतनी रात को….?

रामलाल – हाँ बेटी बहु की तबियत खराब हो तो हमें नींद कैसे आती. सोचा देख लें तुम ठीक से सो तो रही हो.

कंचन – सच पिता जी आप कितने अच्छे हैं.. हम तो बहुत लकी हैं जो इतने अच्छे सास और ससुर मिले.

रामलाल – ऐसा न कहो बहु! तुम रोज़ हमारी इतनी सेवा करती हो तो क्या हम एकदिन भी तुम्हारी सेवा नहीं कर सकते? हमारी अपनी बेटी होती तो क्या हम ये सब नहीं करते” रामलाल प्यार से बहु की पीठ सहलाते हुए बोला.

कंचन मन ही मन हँसते हुए सोचने लगी अपनी बेटी को भी आधि रात को नंगी करके उसके मुंह मे लंड पेल देते? पिता जी हम बिलकुल ठीक हैं. आप सो जाइये.

रामलाल- अच्छा बहु हम चलते हैं, आज तो तुमने कपड़े भी नहीं बदले, बहुत थक गयी होगी.

कंचन – जी सर में बहुत दर्द हो रहा था.

रामलाल- हम समझते हैं बहु! अरे ये क्या! तुम्हारी कच्छी और ब्रा नीचे ज़मीन पे पड़ी हुई है?

रामलाल ऐसे बोला जैसे उसकी नज़र बहु की कच्छी और ब्रा पर अभी पड़ी हो. रामलाल ने बहु की कच्छी और ब्रा उठा ली.

जी हमें दे दीजिये. कंचन शर्माते हुए बोली.

रामलाल – तुम आराम करो हम धोने डाल देंगे! लेकिन ऐसे अपनी कच्छी ना फेंका करो, वो कला नाग सूँघता हुआ आ जाएगा तो क्या होगा? उस दिन तो तुम बच गयी नहीं तो टांगों के बीच में ज़रूर काट लेता.

कंचन ने मन ही मन कहा – वो कला नाग काटे या न काटे लेकिन ससुरजी की टांगों के बीच का काला नाग ज़रूर किसी दिन काट लेगा.

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रामलाल बहु की कच्छी और ब्रा ले के चला गया. कंचन अच्छी तरह जानती थी की उसकी कच्छी का क्या हाल होने वाला है. रामलाल बहु की कच्ची अपने कमरे में ले गया और उसकी मादक खुशबू सूंघ के अपने लंड के सुपाड़े पे रख के रगड़ने लगा. हमेशा की तरह ढेर सारा वीर्य बहु की कच्छी में उंडेल दिया और लंड कच्छी ही से पोंछ के उसे धोने में डाल दिया. कच्छी की दास्तान कंचन को अगले दिन कपड़े धोते समय पता लग गयी. कंचन का प्लान तो सफल हो गया और ससुर जी के इरादे भी बिल्कुल साफ हो गए थे, लेकिन कंचन अभी तक ससुर जी के लंड के दर्शन नहीं कर पायी थी. एक दिन फिर से सासु माँ को शहर जाना था. इस बार रामलाल ने फिर उन्हें अकेला ही भेज दिया. बीवी के जाने के बाद वो कंचन से बोला… Sasur bahu xxx sex story

रामलाल – बहु आज बदन में बहुत दर्द हो रहा है ज़रा कमला को बुला दो, बहुत अच्छी मालिश करती है, बदन का दर्द दूर कर देगी.

ये सुनके कंचन को जलन होने लगी, वो जानती थी कमला कैसी मालिश करेगी. कंचन ने सोचा आज अच्छा मौका है, सासु माँ भी नहीं है.

वो बोली – क्यों पिताजी घर में बहु के रहते आप किसी और को क्यों मालिश के लिए बुलाना चाहते हैं? आपने हमारी मालिश कहाँ देखि है? एक बार करवा के देखिये कमला की मालिश भूल जाएंगे.

रामलाल – अरे नहीं बेटी हम अपनी बहु से कैसे मालिश करवा सकते हैं ?

रामलाल के मन में लड्डू फूटने लगे. वो सोच रहा था की ये तो सुनहरा मौका है. हाथ से नहीं जाने देना चाहिए.

कंचन – आप हमें बेटी बोल रहे हैं लेकिन शायद अपनी बेटी की तरह नहीं मानते? आपकी सेवा करके हमें बहुत ख़ुशी मिलती है।

रामलाल – ऐसा न कहो बहु! तुम बेटी के समान नहीं हमारी बेटी ही हो! तुम सचमुच बहुत अच्छी हो, लेकिन तुम्हारी सासु माँ को पता चल गया तो वो मुझे मार डालेगी।

कंचन – कैसे पता चलेगा पिताजी वो तो शाम तक आएगी. चलिए अब हम आपकी मालिश कर देते हैं. आपको भी तो पता चले की आपकी बहु कैसी मालिश करती है।

रामलाल – ठीक है बहु! लेकिन अपनी सासु माँ को बताना नहीं।

कंचन – नहीं बताएंगे पिताजी आप बेफिकर रहिये।

रामलाल ने जल्दी से ज़मीन पे चटाई बिछा दी और धोती को छोड़के सब कपड़े उतार के लेट गया. उसका दिल धक् धक् कर रहा था. कंचन रामलाल के गठे हुए बदन को देखती ही रह गयी. वाकई में सच्चा मर्द था. चौड़ी छाती और उसपे घने काल बाल देख कर तो कंचन के दिल पे छुरियाँ चलने लगी. कंचन ने रामलाल की टांगों की मालिश शुरू कर दी. साड़ी के पल्लू से उसने घूंघट भी कर रखा था. बहु के मुलायम हाथों का स्पर्श रामलाल को बहुत अच्छा लग रहा था. कंचन ने पहले से ही प्लान बना रखा था. अचानक तेल की बोतल कंचन की साड़ी पे गिर गयी।

कंचन – उफ़्फ़! हमारी साड़ी खराब हो गयी।

रामलाल – बहु साड़ी पहन के कोई मालिश करता है क्या? खराब कर ली ना अपनी साड़ी? चलो साड़ी उतार लो फिर मालिश करना.

कंचन – जी मैं सलवार कमीज पहन के आती हूँ।

रामलाल – अरे उसकी क्या ज़रुरत है? साड़ी उतार लो बस. सलवार पे तेल गिर गया तो सलवार उतारनी पड़ जाएगी. अगर सलवार उतारना मंज़ूर है तो ठीक है सलवार कमीज पहन आओ।

कंचन – हां! सलवार कैसे उतारेंगे! सलवार उतारने से तो अच्छा है कि साड़ी ही उतार दूँ लेकिन आपके सामने साड़ी कैसे उतारूं? हमे तो शर्म आती है.

रामलाल – शर्म कैसी बहु? तुम तो हमारी बेटी के सामान हो और फिर हम तो तुम्हें पेटीकोट ब्लाउज में कई बार देख चुके हैं! अपने ससुर से कोई शर्माता है क्या?

कंचन – ठीक है पिताजी! उतार देती हूँ.

कंचन ने बड़ी अदा के साथ अपनी साड़ी उतार दी. अब वो केवल पेटीकोट और ब्लाउज में थी. पेटीकोट बहुत नीचे बाँध रखा था, ब्लाउज भी सामने से लौ कट था. अचानक कंचन कमरे से बाहर भागी।

रामलाल- अरे क्या हुआ बहु कहाँ जा रही हो?

कंचन – जी बस अभी आई! अपनी चुन्नी तो ले आऊं.

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रामलाल तो बहु के ऊपर नीचे होते हुए नितम्बों को देख कर निहाल हो गया. कंचन थोड़ी देर में वापस आ गयी. अब उसने चुन्नी से घूंघट निकाल रखा था. लेकिन कमर पे बहुत नीचे बंधे पेटीकोट और लौ कट ब्लाउज में से उसकी जवानी बाहर निकल रही थी. कंचन रामलाल के पास बैठ गयी और उसने फिर से रामलाल की टांगों की मालिश शुरू कर दी. इस वक्त कंचन का सर रामलाल के सर की ओर था. मालिश करते हुए बहु इस प्रकार से झुकी हुई थी की लौ कट ब्लाउज में से उसकी ब्रा से बड़ी बड़ी झूलती हुई चूचियाँ रामलाल को साफ़ दिखाई दे रही थी. मालिश करते हुए दोनों इधर उधर की बातें कर रहे थे. कंचन को अच्छी तरह मालूम था की ससुर जी की नज़रें उसके ब्लाउज के अंदर झांक रही हैं. आज तो कंचन ने ठान लिया था की ससुर जी को पूरी तरह तड़पा के ही छोड़ेगी. मर्दों को तड़पाने की कला में तो वो माहिर थी ही. इतने में रामलाल ने बहु से पुछा. Sasur bahu xxx sex story

रामलाल – बहु तुमने वो गाना सुना है.. चोली के पीछे क्या है ? चुनरी के नीचे क्या है?

कंचन – जी पिता जी सुना है! आपको अच्छा लगता है.?

कंचन आगे झुकते हुए ससुर जी को अपनी गोरी गोरी चूचिओं के और भी ज़्यादा दर्शन कराती हुई बोली.

रामलाल – हाँ बहु बहुत अच्छा लगता है.

कंचन समझ रही थी की ससुरजी का इशारा किस ओर है. ससुर जी की जाँघों तक मालिश करने के बाद कंचन ने सोचा की अब ससुर जी को उसके नितम्बों के दर्शन कराने का वक़्त आ गया है. कंचन जानती थी की उसके नितम्ब मरदों पर क्या असर करते हैं. उसने जाँघों से नीचे की ओर मालिश करने के बहाने अब अपना मुंह ससुर जी के पैरों की ओर और अपने विशालकाय चूतड़ ससुर जी के मुंह की ओर कर दिए. मालिश करते हुए उसने अपने चूतड़ बड़े ही मादक ढंग से पीछे की और उभार दिए थे. रामलाल के दिल पे तो मानो छुरी चल गयी. पेटीकोट के महीन कपड़े में से बहु की गुलाबी रंग की कच्छी झाँक रही थी. रामलाल बहु के विशाल चूतड़ों को ललचायी नज़रों से देखता हुआ बोला..

रामलाल – अरे बहु ऐसे मालिश करने में परेशानी होगी. हमारे ऊपर आ जाओ।

कंचन – हाय राम! हम आपके ऊपर कैसे आ सकते हैं?

रामलाल – अरे इसमें शर्माने की क्या बात है? अपनी एक टांग हमारे एक तरफ और दूसरी टांग दूसरी तरफ कर लो.

कंचन – जी आपको परेशानी तो नहीं होगी ?

कंचन रामलाल के ऊपर आ गयी. अब उसका एक घुटना ससुर जी की कमर के एक तरफ और दूसरा घुटना कमर के दूसरी तरफ था. पेटीकोट घुटनों तक ऊपर करना पड़ा. इस मुद्रा में कंचन के विशाल चूतड़ रामलाल के मुंह के ठीक सामने थे. घुटनों से नीचे कंचन के गोरे गोरे पैर नंगे थे. कंचन रामलाल के पैरों की और मुंह करके उसकी जांघों से नीचे की और मालिश कर रही थी. रामलाल का मन कर रहा था की बहु के चूतड़ों के बीच मुंह दे दे. वो पेटीकोट के अंदर से बहु के विशाल चूतड़ों पे सिमटती हुई कच्छी को देख रहा था. बहु तुम जितनी समझदार हो उतनी ही सूंदर भी हो.

कंचन – सच पिता जी कहीं आप हमें खुश करने के लिए तो नहीं बोल रहे हैं.

रामलाल – तुम्हारी कसम बहु हम झूट क्यों बोलेंगे? तभी तो हमने तुम्हें एकदम राकेश के लिए पसंद कर लिया था. शादी से पहले तुम्हारे पीछे बहुत लड़के चक्कर लगाते होंगे.?

कंचन- जी वो तो सभी लड़किओं के पीछे चक्कर लगाते हैं.

रामलाल – नहीं बहु सभी लड़कियां तुम्हारी तरह सेक्सी नहीं होती, बोलो लड़के बहुत तंग करते थे क्या?

कंचन – हाँ पिता जी करते तो थे.

रामलाल – क्या करते थे बहु?

कंचन- अब हम आपको वो सब कैसे बता सकते हैं?

रामलाल – अरे फिर से वही शर्माना! चलो बताओ! हमें ससुर नहीं अपना दोस्त समझो.

कंचन – जी सीटियाँ मारते थे! कभी कभी तो बहुत गंदे गंदे कमेंट भी करते थे! बहुत सी बातें तो हमें समझ ही नहीं आती थी.

रामलाल – क्या बोलते थे बहु?

कंचन – उनकी गन्दी बातें हमें समझ नहीं आती थी, लेकिन इतना ज़रूर पता था की हमारी छातिओं और नितम्बों पे कमेंट देते थे।

रामलाल – कैसे खराब होते हैं लड़के! घर में माँ बहिन नहीं होते क्या? और क्या क्या करते थे?

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कंचन – जी क्लास में भी लड़के जानबूझ के अपनी पेंसिल हमारे पैरों के पास फ़ेंक देते थे और उसे उठाने के बहाने हमारी स्कर्ट के अंदर टांगों के बीच में झाँकने की कोशिश करते थे. स्कूल की ड्रेस स्कर्ट थी नहीं तो हम सलवार कमीज ही पहन के स्कूल जाते. लड़के लोग होते ही बहुत खराब हैं. Sasur bahu xxx sex story

रामलाल – नहीं बहु लड़के खराब नहीं होते। वो तो बेचारे तुम्हारी जवानी से परेशान रहते होंगे।

कंचन – लेकिन किसी लड़की पे गंदे गंदे कमेंट देना और उसकी टांगों के बीच में झांकना तो बदतमीज़ी होती है ना पिताजी?

रामलाल – इसमें बदतमीज़ी की क्या बात है बहु. बचपन से ही हर मर्द जात में औरत की टांगों के बीच में झाँकने की जिज्ञासा होती है और जब वो बड़ा हो जाता है तब तो औरत की टांगों के बीच में पहुंचना ही उसका लक्ष्य बन जाता है।

कंचन – हां! ये भी क्या लक्ष्य हुआ.? मर्द लोग तो होते ही ऐसे हैं.

रामलाल – लेकिन बहु लड़कियां भी तो कम नहीं होती. देखो न आज कल तो शहर की ज्यादातर लड़कियां शादी से पहले ही अपना सबकुछ दे देती हैं, तुम भी तो शहर की हो बहु.

कंचन – अच्छा पिता जी! क्या मतलब आपका? हम वैसे नहीं हैं. इतने लड़के हमारे पीछे पड़े थे यहां तक की कई मास्टर जी लोग भी हमारे पीछे पड़े थे, लेकिन हमने तो शादी से पहले ऐसा वैसा कुछ नहीं किया.

रामलाल – सच बहु? यकीन नहीं होता की इतनी सेक्सी लड़की को लड़कों ने कुँवारा छोड़ दिया होगा.

कंचन – हमने किसी लड़के को आज तक हाथ भी नहीं लगाने दिया.

रामलाल – आज तक बेचारा राकेश अभी तक कुंवारा ही है. सुहागरात को भी हाथ नहीं लगाने दिया? रामलाल हँसता हुआ बोला.

कंचन – हां …पिता जी आप तो बहुत खराब हैं. सुहागरात को तो पति का हक़ बनता है, उन्हें थोड़े ही हम मना कर सकते हैं.

कंचन बड़े ही मादक ढंग से अपने चूतड़ों को रामलाल के मुंह की और उचकाती हुई बोली. रामलाल कंचन के चूतड़ों से सिमट कर उनकी दरार में जाती हुई कच्ची को देख देख कर पागल हो रहा था.

रामलाल – बहु एक बात कहूं? तुम शादी के बाद से बहुत ही खूबसूरत हो गयी हो.

कंचन – पिता जी आप तो ऐसे बोल रहे हैं जैसे शादी से पहले हम बदसूरत थे.

रामलाल – अरे नहीं बहु शादी से पहले भी तुम बहुत सुंदर थी, लेकिन शादी के बाद से तो तुम्हारी जवानी और भी निखर आई है. हर लड़की की जवानी में शादी के बाद एकदम निखार आ जाता है.

ऐसा क्यों पिताजी?” कंचन ने भोलेपन से पूछा.

रामलाल – बहु शादी से पहले लड़की एक कच्ची कली होती है. कली को फूल बनाने का काम तो मर्द ही कर सकता है ना. सुहागरात को लड़की एक कली से फूल बन जाती है. जैसे कली में फूल बनके निखार आ जाता है वैसे ही लड़की की जवानी में शादी के बाद निखार आने लगता है.

कंचन – ऐसा क्या निखार आया हमारी जवानी में? हम तो पहले भी ऐसे ही थे.

रामलाल – बहु तुम्हारी जवानी में क्या निखार आया वो हमसे पूछो. तुम्हारा बदन एकदम भर गया है. कपड़े भी टाइट होने लगे हैं. देखो ये नितम्ब कैसे फैल गए हैं. रामलाल कंचन के दोनो चूतड़ों पे हाथ फेरता हुआ बोला. तुम्हारी ये कच्छी भी कितनी छोटी हो गयी है. करीब करीब पूरे ही नितम्ब इस कच्छी के बाहर हैं. शादी से पहले तो ऐसा नहीं था न.

आखिर कंचन का प्लान सफल होने लगा था. रामलाल का हाथ उसके उचके हुए चूतड़ों को सहला रहा था. कभी कभी रामलाल उसकी पैंटी लाइन पे हाथ फेरता. कंचन को बहुत मज़ा आ रहा था.

रामलाल फिर बोला – बहु लगता है तुम्हें ये गुलाबी रंग की कच्छी बहुत पसंद है.

कंचन- हां..! पिताजी आपको कैसे पता हमने कौन से रंग की कच्छी पहनी है?

रामलाल – बहु तुम्हारे नितम्ब हैं ही इतने चौड़े की उनके ऊपर कसे हुए पेटिकट में से कच्छी भी नज़र आ रही है.

कंचन – हाय राम! पिताजी हमें सलवार कमीज पहनने दीजिये, हमें शर्म आ रही है.

रामलाल – अरे बहु शर्म कैसी तुम तो हमारी बेटी के सामान हो. रामलाल कंचन की कच्छी पे हाथ फेरता हुआ बोला.

कंचन भी रामलाल की टांगों पे मालिश करने का नाटक कर रही थी. रामलाल बहु के विशाल नितम्बों को दबाता हुआ बोला…

रामलाल – बहु तुम राजेश का ख्याल तो रखती हो न.

कंचन – जी आप बेफिकर रहिये हम उनका बहुत ख्याल रखते हैं. जब हम आपका इतना ख्याल कर सकते हैं तो क्या उनका नहीं करेंगे? उन्हें हमसे कभी शिकायत का मौका नहीं मिलेगा.

रामलाल – शाबाश बहु हमें तुमसे यही उम्मीद थी. लेकिन हमारा मतलब था की इस लाजबाब जवानी को बेकार तो नहीं कर रही हो. राजेश को खुश तो रखती हो. वो जो कुछ चाहता है उसे देती हो न.

कंचन – जी वो जो चाहते हैं हम उन्हें देते हैं. जैसा खाना पसंद है वैसा ही बनाते हैं.

कंचन रामलाल का मतलब अच्छी तरह समझ रही थी लेकिन अनजान बनने का नाटक कर रही थी.

रामलाल – बहु तुम तो बहुत भोली हो. हम खाने पीने की बात नहीं कर रहे. खाने पीने के इलावा भी मरद की ज़रूरतें होती हैं जिन्हें अगर बीवी पूरा न करे तो मरद दूसरी औरतों के पास जाने लगता है. उसे अपनी जवानी रोज़ देती हो की नहीं। Sasur bahu xxx sex story

कंचन शर्माने का नाटक करती हुई बोली पिताजी आप ये कैसी बातें कर रहे हैं? हमें तो बहुत शर्म आ रही है.

रामलाल – अपने ससुर से क्या शर्माना बहु हमारी बहु खुश है या नहीं ये जानना हमारा फ़र्ज़ है. बोलो है या नहीं.

कंचन – जी है!

रामलाल – तो फिर बताओ उसे रोज़ देती हो या नहीं?

रामलाल का हाथ अब फिसलकर कंचन के चूतड़ों की दरार में आ गया था. वो उसके चूतड़ों की दरार में हाथ फेरता हुआ बोला..

रामलाल – बोलो बहु शर्माओ नहीं.

कंचन – जज..जी वो जब चाहते हैं ले लेते हैं. हम कभी मना नहीं करते.

रामलाल – वो जब चाहता है तब लेता है. तुम अपने आप कभी नहीं देती हो?

कंचन – हम तो औरत हैं. पहल करना तो मरद का काम होता है.

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कंचन ने मन ही मन सोचा की रामलाल ने कितनी सफाई से लेने देने की बातें शुरु कर दी थी और अब तो उसके चूतड़ों की दरार में भी हाथ फेर रहा था. सचमुच ससुर जी काफी मंजे हुए खिलाड़ी थे.

रामलाल बोल रहा था – बहु तुम इतनी सेक्सी हो! वो नालायक तो तुम्हारी रोज़ लेता होगा।

कंचन – पिता जी प्लीज..! आप ये सब क्यों पूछ रहे हैं. हमें तो बहुत शरम आ रही है.

रामलाल – अभी हमने कहा था की हमारा बेटा और बहु खुश हैं या नहीं ये जानना हमारा फ़र्ज़ है. जबाब दो. रोज़ लेता तो है न तुम्हारी ?

कंचन – नहीं पिताजी ऐसी कोई बात नहीं है. उन्हें तो फुरसत ही नहीं मिलती. ऑफिस से थक के आते हैं और जल्दी ही सो जाते हैं. महीने में मुश्किल से एक दो बार ही लेते है। हमें तो लगता है की शायद हम इतने सेक्सी हैं ही नहीं की हम उन्हें रिझा सकें.

रामलाल – कैसी बातें करती हो बहु! तुम तो इतनी सुंदर और सेक्सी हो की तुम्हें कपड़ों में देख कर भी किसी बाल ब्रह्मचारी का लंड खड़ा हो जाए और अगर नंगी हो जाओ तब तो भगवान भी अपने पे काबू नहीं कर सकते.

पहली बार रामलाल ने कंचन के सामने लंड जैसे शब्द का इस्तेमाल किया. चूतड़ों की दरार में हाथ रगड़ने और रामलाल के मुंह से इस तरह की बातें सुन के कंचन की चूत गीली होने लगी थी. वो शर्माने का नाटक करते हुए बोली..

कंचन – हाय…. पिताजी आप अपनी बहु के सामने ये कैसे गंदे शब्द बोल रहे हैं? हमें तो बहुत शर्म आ रही है. प्लीज अब हमें जाने दीजिये ना.

रामलाल दोनों हाथों से कंचन के विशाल चूतड़ों को दबाता हुआ बोला..

रामलाल – अरे बहु इसमें शर्माने की क्या बात है. अब मरद के लंड को लंड नहीं तो और क्या कहें? बोलो तुम्हारे पास लंड के लिए कोई और शब्द है तो बताओ.

कंचन शर्माने का नाटक करती हुई चुप रही.

रामलाल – अरे बहु बोलो चुप क्यों हो?

कंचन – जी हमे नहीं पता. हमने भी लड़कों के मुंह से यही शब्द सुना है.

रामलाल – तो फिर लंड को लंड कहने में शर्म कैसी? लेकिन बहु महीने में सिर्फ एक दो बार से तुम्हारा काम चल जाता है? तुम्हारी इस जवानी को तो रोज़ मरद की ज़रुरत है.

कंचन – अब हम कर भी क्या सकते हैं?

रामलाल – उसे तुम्हारी पसंद तो है न?

कंचन – जी हमें क्या पता?

रामलाल – ये बात तो हर औरत को पता होनी चाहिए. वैसे कुछ मर्दों को वो औरतें पसंद होती हैं जिनकी बहुत फूली हुई होती है. तुम्हारी कैसी है बहु? रामलाल मज़े लेता हुआ बोला.

कंचन – जी हमें क्या पता?

रामलाल – बहु तुम्हें कुछ पता भी है? चलो हम ही पता कर लेते हैं हमारी बहु रानी की कैसी है.

ये कहते हुए रामलाल ने कंचन के चूतड़ों के बीच हाथ डाल कर पेटीकोट के ऊपर से ही उसकी फूली हुई चूत को अपनी मुट्ठी में भर लिया. बाप रे क्या फूली हुई चूत थी बहु की.

कंचन – उईईईई. ….इस्सस. पिता जी !आआआ… प्लीज! ये आप क्या कर रहे हैं? छोड़िये ना आ…. हम आपकी बहु हैं.

लेकिन कंचन ने अपनी चूत छुड़ाने की कोई कोशिश नहीं की. बल्कि अपनी टांगें इस प्रकार से चौड़ी कर ली और चूतड़ ऊपर की ओर उचका दिए ताकी उसकी चूत रामलाल के हाथ में ठीक तरह से समा जाए. कंचन के पूरे बदन में वासना की लहर दौर रही थी.

रामलाल – क्या छोड़ूँ बहु?

कंचन – वही जो आपने पकड़ रखी है. प्लीज उसे. …छोड़िये ना आ……

रामलाल – हमने क्या पकड़ रखी है? बता दो तो छोड़ देंगे.

कंचन – वही जो औरतों की टांगों के बीच में होती है.

रामलाल – क्या होती है बहु?

कंचन – उफ!! पिताजी आप तो बड़े वो हैं छोड़िये ना हमारी..प्लीज. .आह!!

रामलाल – जब तक बताओगी नहीं की क्या छोड़ें तब तक हमें कैसे पता चलेगा की क्या छोड़ना है?

कंचन – हाय राम! हमें सचमुच नहीं पता उसे क्या कहते हैं, आप ही बता दीजिये.

रामलाल – बहु तुम इतनी भी भोली नहीं हो. चलो हम ही बता देते हैं. इसे चूत कहते हैं.

कंचन – ठीक है हमारी …हमारी.. च..चूत छोड़ दीजिये प्लीज.. हम आपकी बहु हैं.

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रामलाल – हाँ अब हुई ना बात बहु. चूत बोलने में इतना शर्माती हो चूत देने में भी तो इतना नहीं शर्माती? तभी बेचारा राकेश तुम्हारी ले नहीं पाता होगा. रामलाल कंचन की चूत मुट्ठी में मसलता हुआ बोला. Sasur bahu xxx sex story

कंचन – इस्स्स्सस्स….. क्या कर रहे हैं? प्लीज छोड़िये ना हमारी…

रामलाल – पहले बताओ चूत देने में भी इतना शर्माती हो?

कंचन – नहीं पहले आप हमारी छोड़िये. फिर बताउंगी.

रामलाल – फिर वही बात! हमारी छोड़िये हमारी छोड़िये कर रही हो. आखिर क्या छोड़ें?

कंचन – उफ़्फ़!! पिता जी आप तो बहुत ही खराब हैं. प्लीज हमारी चूत छोड़ दीजिये. हम तो आपकी बेटी के सामान हैं.

रामलाल – ठीक है बहु ये लो छोड़ देते हैं.

जैसे ही रामलाल ने कंचन की चूत को आज़ाद किया वो रामलाल के ऊपर से उठ कर साइड में बैठ गयी.

कंचन – पिताजी आप तो बड़े खराब हैं. अपनी बहु के साथ ऐसा करता है कोई? अब हम आपकी मालिश साइड में बैठ कर ही करेंगे.

रामलाल – अरे बहु की चूत पकड़ना मना है क्या? ठीक है साइड में बैठ के मालिश कर दो. लेकिन बहु तुम्हारी चूत तो बहुत फूली हुई है. मरद तो ऐसी ही चूत के लिए तरसते हैं. अब बताओ अपनी इस प्यारी चूत को देने में तो शर्म नहीं करती हो?

कंचन – जी देने में किस बात की शर्म? वैसे भी जब वो लेते हैं लाइट बन्द होती है. उन्हें कैसे पता चलेगा की हमारी कैसी है?

रामलाल – शाबाश बहु चूत देने में कोई शर्म नहीं करनी चाहिए, लेकिन वो नालायक लाइट बन्द करके चोदता है तुम्हें? तुम जैसी सुंदर और सेक्सी औरत को तो नंगी देखने के लिए भगवान भी तड़प जाए, औरत को चोदने का मज़ा तो उसे पूरी तरह नंगी करके ही आता है. और उसकी नंगी जवानी का रस पान करने के लिए लाइट जला के चोदना तो ज़रूरी है.

कंचन ने नोटिस किया की रामलाल ने अब लेने देने की जगह `चोदने’ जैसा शब्द बोलना शुरू कर दिया था.

कंचन – लेकिन पिता जी वो तो ऐसा कुछ भी नहीं करते.

रामलाल – तुम्हारा मतलब वो तुम्हें नंगी तक नहीं करता?

कंचन – जी नहीं! कंचन शर्माते हुए बोली.

रामलाल – तो फिर! फिर क्या? तो फिर कैसे चोदता है वो हमारी प्यारी बहुरानी को?

कंचन – बस पेटीकोट ऊपर उठा के…..

रामलाल – बहुत ही नालायक है! लेकिन उसका लंड बड़ा तो है न?

कंचन – जी वो तो खासा लम्बा और मोटा है। बिलकुल उस गधे के लंड जैसा।

रामलाल – तब तो हमारी बहु की तृप्ति कर देता होगा.?

कंचन – हाँ….! उस गधे के जितना तो किसी का भी नहीं हो सकता।

रामलाल – सिर्फ बड़ा होने से कुछ नहीं होता, मरद को भी तो औरत को तृप्त करने की कला आनी चाहिए.

कंचन – वो तो अक्सर पैंटी भी नहीं उतारते बस साइड में करके ही कर लेते हैं.

रामलाल – ये तो गलत बात है, ऐसे तो हमारी बहु की प्यास शांत नहीं हो सकती. लेकिन बहु तुम्हें ही कुछ करना चाहिए. अगर औरत काम कला में माहिर ना हो तो मरद दूसरी औरतों की और भागने लगता है. बीवी को बिस्तर में बिलकुल रंडी बन जाना चाहिए तभी वो अपने पति का दिल जीत सकती है.

कंचन – आपकी बात सही है पिताजी हम तो सब कुछ करने के लिए तैयार हैं. लेकिन मरद अपनी बीवी के साथ जो कुछ भी करना चाहता है उसके लिए पहल तो उसे ही करनी होती है न. वो जो भी करना चाहें हम तो हमेशा उनका साथ देने के लिए तैयार हैं.

रामलाल – हमें लगता है की हमारी बहु प्यासी ही रह जाती है. क्यों सही बात है?

कंचन – जी..

रामलाल – कहो तो हम उसे समझाने की कोशिश करें?. ऐसा कब तक चलेगा!

कंचन – नहीं नहीं पिताजी उनसे कुछ कहने की ज़रुरत नहीं है.

रामलाल – तो फिर ऐसे ही तड़पती रहोगी बहु?

कंचन – और कर भी क्या सकते हैं ?

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रामलाल को अब विश्वास हो गया था की उसका बेटा बहु के जिस्म की प्यास को नहीं बुझा पाता है. इतनी खूबसूरत जवानी को इस तरह बर्बाद करना तो पाप है. अब तो उसे ही कुछ करना होगा. कंचन फिर से रामलाल की टांगों की मालिश करने लगी. कंचन का मुंह अब रामलाल की ओर था. बार बार इस तरह से झुकती की उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ और ब्रा रामलाल को नज़र आने लगते. रामलाल अच्छी तरह जानता था, की आज ही सुनहरा मौका था. लोहा भी गरम है. आज अगर बहु की जवानी लूटने में कामयाब हो गया तो ज़िन्दगी बन जाएगी. रामलाल का लंड बुरी तरह फनफनाया हुआ था और टाइट लंगोट की साइड में से आधा बाहर निकल आया था और उसकी जांघ के साथ सटा हुआ था. Sasur bahu xxx sex story

रामलाल बोला – देखो बहु तुम चाहती हो तुम्हारी जवानी की आग ठंडी हो?

कंचन – जी कौन औरत नहीं चाहती?

रामलाल – हम तुम्हारे ससुर हैं! तुम्हारी जवानी की आग को ठंडा करना हमारा धरम है. हमें ही कुछ करना होगा.

कंचन – आप क्या कर सकते हैं पिताजी हमारी किस्मत ही ऐसी है ?

कंचन एक ठंडी सांस लेते हुए रामलाल की जांघ पे तेल लगाती हुइ बोली.

रामलाल – ऐसा न कहो बहु! अपनी किस्मत तो अपने हाथ में होती है. अरे बहू तुमने हमारी कमर से ले के टांगों तक तो मालिश कर दी लेकिन एक जगह तो छोड़ ही दी.

कंचन – कौन सी?

रामलाल – अरे धोती के नीचे भी बहुत कुछ है, वहां भी मालिश कर दो.

कंचन – जी वहां..?

रामलाल – भाई नहीं करना चाहती हो तो कोई बात नहीं हम वहां कमला से मालिश करवा लेंगे.

कंचन – नहीं नहीं पिताजी कमला से क्यों? हम हैं न.

कंचन ने शरमाते हुए रामलाल की धोती ऊपर कर दी. नीचे का नज़ारा देख के उसका दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा. कसे हुए लंगोट का उभार देखने लायक था. कंचन ने लंगोट वाले इलाके को छोड़ के लंगोट के चारो ओर मालिश कर दी.

कंचन – लीजिये पिताजी वहां भी मालिश कर दी.

रामलाल – बहु वहां तो अभी और भी बहुत कुछ है.

कंचन – और तो कुछ भी नहीं है.

रामलाल – ज़रा लंगोट के नीचे तो देखो बहुत कुछ मिलेगा.

कंचन – क्या……! लंगोट के नीचे वहां तो आपका वो है. हमें तो बहुत शरम आ रही है.

रामलाल – शर्म कैसी बहु? तुम तो ऐसे शर्मा रही हो जैसे कभी मरद का लण्ड नहीं देखा.

कंचन – जी किसी पराए मरद का तो नहीं देखा न.

रामलाल – अच्छा तो तुम हमें पराया समझती हो ?

कंचन – नहीं नहीं पिता जी ऐसी बात नहीं है.

रामलाल – अगर ऐसी बात नहीं है तो इतना शर्मा क्यों रही हो? वो तुम्हें काटेगा नहीं. चलो लंगोट खोल दो और वहां की भी मालिश कर दो.

कंचन – जी हम तो आपकी बहू हैं. हम आपके उसको कैसे हाथ लगा सकते हैं?

रामलाल – ठीक है बहु कोई बात नहीं वहां की मालिश हम कमला से करवा लेंगे.

कंचन – नहीं नहीं पिताजी ये आप क्या कह रहे हैं? किसी परायी औरत से तो अच्छा है हम ही वहां की मालिश कर दें.

रामलाल – तो फिर शर्मा क्यों रही हो बहु?

ये कहते हुए रामलाल ने बहु का हाथ पकड़ के लंगोट पे रख दिया. लंगोट के ऊपर से ससुर जी के मोटे लंड की गर्माहट से कंचन कांप गयी. कांपते हुए हाथों से कंचन ससुर जी का लंगोट खोलने की कोशिश कर रही थी. आखिर आज ससुर जी का लंड देखने की मुराद पूरी हो ही जाएगी. जैसे ही लँगोट खुला रामलाल का लंड लंगोट से आज़ाद होके एक झटके के साथ तन खड़ा हो गया. 11 इंच के लम्बे मोठे काले लंड को देख के कंचन के मुंह से चीख निकल गयी. Sasur bahu xxx sex story

कंचन – उई माँ.. ये क्या है..?!

रामलाल – क्या हुआ बहु..?

कंचन – जी.. इतना लम्बा…

रामलाल – नहीं पसंद आया?

कंचन – जी वो बात नहीं है!

रामलाल – मरद का इतना बड़ा भी हो सकता है।

कंचन – सच पिताजी ये तो बिलकुल उस गधे के जैसा है! अब समझी सासु माँ आपको क्यों गधा कहती हैं.

रामलाल – घबराओ नहीं बहु हाथ लगा के देख लो. काटेगा नहीं.

कंचन मन ही मन सोचने लगी काटेगा तो नहीं लेकिन मेरी चूत ज़रूर फाड़ेगा. बाप का लंड तो बेटों के लंड से कहीं ज़्यादा तगड़ा निकला कंचन उस फौलादी लौड़े को सहलाने के लिए बेचैन तो थी ही. उसने ढेर सारा तेल अपने हाथ में लेके रामलाल के तने हुए लौड़े पे मलना शुरु कर दिया. न जाने कितनी चूतों का रस पी के इतना मोटा हो गया था. क्या भयंकर सुपाड़ा था. मोटा लाल हथोड़े जैसा. कुंवारी चूत के लिए तो बहुत खतरनाक हो सकता था. कंचन को दोनों हाथों का इस्तेमाल करना पड़ रहा था फिर भी रामलाल का लौड़ा उसके हाथों में नहीं समां रहा था. इतना मोटा था की दोनों हाथों से उसकी मोटाई नापनी पड़ी. जब जब कंचन का हाथ लंड पे मालिश करते हुए नीचे की ओर जाता, लंड का मोटा लाल सुपाड़ा और भी ज़्यादा भयंकर लगने लगता.

कंचन – पिता जी एक बात पूछूं? बुरा तो नहीं मानेंगे?

रामलाल – नहीं बहु ज़रूर पूछो.

कंचन – जी सासु माँ तो आपसे बहुत खुश होंगी?

वो क्यों? रामलाल अनजान बनता हुआ बोला.

कंचन – इतना लम्बा और मोटा पा के कौन औरत खुश नहीं होगी?

रामलाल – अरे नहीं बहु ये ही तो हमारी बद-किस्मती है, बस एक गलती कर बैठे उसका फल अभी तक भुगत रहे हैं.

कंचन – कैसी गलती पिताजी?

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रामलाल – अरे बहु सुहागरात को जोश जोश में कुछ ज्यादा ज़ोर से धक्के मार दिए और पूरा लंड तुम्हारी सासु माँ की चूत में पेल दिया, तुम्हारी सासु माँ तो कुंवारी थी, झेल नहीं सकी, बहुत खून खराबा हो गया था, बेचारी बेहोश हो गयी थी. बस उसके बाद से मन में इतना डर बैठ गया की आज तक चुदवाने से डरती है. बड़ी मिन्नत करके 6 महीने में एक बार चोद पाते हैं उसके बाद भी आधे से ज़्यादा लंड नहीं डालने देती. Sasur bahu xxx sex story

कंचन – ये तो गलत बात है! पति की ज़रुरत पूरी करना तो औरत का धर्म होता है, कोशिश करती तो कुछ दिनों में सासु माँ को आदत पड़ जाती.

रामलाल – क्या करें हमारी दास्ताँ भी कुछ तुम्हारे जैसी है.

कंचन – ओह फिर तो आप भी हमारी तरह प्यासे हैं.

रामलाल – हाँ बहु! सासु माँ को तो हमारा पसंद नहीं आया लेकिन तुम्हें हमारा लंड पसंद आया या नहीं?

जी ये तो बहुत प्यारा है, इतना बड़ा तो औरत को बड़े नसीब से मिलता है, सच हमें तो सासु माँ से जलन हो रही है. कंचन बड़े प्यार से रामलाल के लौड़े को सहलाते हुए बोली.

उसने फिर से अपना मुंह रामलाल की टांगों की ओर और चूतड़ रामलाल के मुंह की ओर कर रखे थे. लंड और टांगों की मालिश करने के बहाने वो आगे की ओर झुकि हुई थी और चूतड़ रामलाल की और उचका रखे थे.

रामलाल – अरे इसमें जलन की क्या बात है आज से ये तुम्हारा हुआ. रामलाल बहु के चूतड़ों पे हाथ फेरता हुआ बोला.

कंचन – जी मैं आपका मतलब समझी नहीं.

रामलाल – देखो बहु हमसे तुम्हारी बर्बाद होती ये जवानी देखि नहीं जाती, हमारे रहते हमारी प्यारी बहु तड़पती रहे ये तो हमारे लिए शर्म की बात है, आखिर हम भी तो मरद हैं. हमारे पास भी वो सब है जो तुम्हारे उस नालायक पति के पास है. अब हमें ही अपनी बहू की प्यास बुझानी पड़ेगी.

रामलाल का हाथ पेटीकोट के ऊपर से ही बहु के विशाल चूतड़ों की दरार में से होता हुआ उसकी चूत पर आ गया.

कंचन -हा…. पिता जी ये आप क्या कह रहे हैं? आपका मतलब आप हमे…..अपनी बहु को..?

रामलाल- हाँ बहु हम अपनी बहु को चोदेंगे! तुम्हारी इस जवानी को एक मोटे तगड़े लंड की ज़रुरत है. हमारी टांगों के बीच में अब भी बहुत दम है.

रामलाल का हाथ अब धीरे धीरे बहु की टांगों के बीच उसकी फूली हुई चूत को पेटीकोट और पैंटी के ऊपर से ही सहला रहा था.

कंचन – पिता जी…! प्लीज..! ऐसा नहीं कहिये! हम आपके जज्बात समझते हैं लेकिन आखिर हम आपकी बहु हैं, आपके बेटे की पत्नी हैं. आपकी बेटी के सामान हैं.

कंचन रामलाल के बड़े बड़े बॉल्स को सहलाती हुइ बोली.

रामलाल- ये सब सही है, तुम हमारी बहु हो, हमारी बेटी के सामान हो. तभी तो हमारा फ़र्ज़ है की हम तुम्हें खुश रखें. कोई गैर औरत होती तो हमें चिंता करने की कोई ज़रुरत नहीं थी. लेकिन अपनी ही बहु के साथ ऐसा अत्याचार हो ये हमें मंज़ूर नहीं.

रामलाल ने ये कहते हुए बहु की चूत को अपनी मुट्टी में भर के दबा दिया.

कंचन – ईस्स्सस्स…… आह.. छोड़िये ना पिताजी आपने तो फिर पकड़ ली हमारी. सोचिये बेटी के समान बहु के साथ ऐसा करना पाप नहीं होगा ?

कंचन ने अपनी चूत छुड़ाने की कोई कोशिश नहीं की. बल्कि टाँगे इस प्रकार चौड़ी कर ली की रामलाल अच्छी तरह उसकी चूत पकड़ सके.

रामलाल बहु की चूत को और भी ज़ोर से मसलता हुआ बोला.. तो क्या ये जानते हुए भी की बेटी के समान बहु की चूत प्यासी है हम चुप बैठे रहें? जब बहु मायका छोड़ के ससुराल आती है तो ससुराल वालों का फ़र्ज़ बनता है की वो अपनी बहु की सब ज़रूरतों का ख्याल रखें.

कंचन – लेकिन हमने तो आपको पिता के समान माना है अब आपके साथ ये सब कैसे कर सकते हैं.

रामलाल- ठीक है बहु अगर हमारे साथ नहीं कर सकती तो कोई बात नहीं हम गाँव में एक ऐसा तगड़ा मर्द ढून्ढ लेंगे जिसका लंड हमारी तरह लम्बा हो और जो हमारी बहु को अच्छी तरह चोद के उसके जिस्म की प्यास बुझा सके. बोलो ये मंज़ूर है?

कंचन – हाय राम!…. ये क्या कह रहे हैं? किसी दुसरे से तो अच्छा है कि आप ही…..

कंचन दोनों हाथों से अपना मुंह छुपाती हुई बोली.

रामलाल – इसमें शर्माने की क्या बात है? बोलो क्या कहना चाहती हो बहु?

रामलाल ने अब अपना हाथ बहु के पेटीकोट के अंदर डाल दिया था और उसकी जांघें सहला रहा था.

कंचन – जी. हमारा मतलब था की अगर इतनी ही मजबूरी हो जाए तो घर की इज़्ज़त तो घर में रहनी चाहिए. किसी गैर मर्द को हम अपनी जवानी कैसे दे सकते हैं? हमारी इज़्ज़त घर वालों के पास ही रहेगी.

रामलाल – तो तुम हमें तो गैर नहीं समझती हो?

कंचन – नहीं नहीं पिताजी! आप गैर कैसे हो सकते है।

रामलाल – सच बहु तुम जितनी खूबसूरत हो उतनी ही समझदार भी हो, घर की इज़्ज़त घर में ही रहनी चाहिए, तुम्हारी सब ज़रूरतें घर में ही पूरी की जा सकती हैं. हम इस बात का पूरा ध्यान रखेंगे की तुम्हें किसी गैर मर्द के लंड की ज़रुरत न महसूस हो.

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रामलाल समझ गया था की बहु भी वासना की आग में जल रही है क्योंकि उसकी कच्छी उसकी चूत के रस से बिलकुल भीग चुकी थी. लेकिन अपने ससुर से चुदवाने में झिझक रही थी. बहु की झिझक दूर करने के लिए उसे शुरू में थोड़ी ज़ोर ज़बरदस्ती करनी पड़ेगी. लोहा गर्म है अगर अभी इस सुनहरे मौके का फायदा नहीं उठाया तो फिर बहु को कभी नहीं चोद पायेगा. लेटे लेटे तो कुछ कर पाना मुश्किल था. रामलाल उठ के खड़ा हो गया. Sasur bahu xxx sex story

कंचन – क्या हुआ पिता जी आप कहाँ जा रहे हैं?

रामलाल – कहीं नहीं बहु अब तुम ठीक से सब जगह तेल लगा दो.

रामलाल के खड़े होते ही उसकी धोती और लंगोट नीचे गिर गए. अब वो बिल्कुल नंगा बहु के सामने खड़ा था. उसका तना हुआ 11 इंच का मोटा काला लंड बहुत भयंकर लग रहा था. ये नज़ारा देख के कंचन की तो सांस ही गले में अटक गयी. उसने खड़े हुए ससुर जी की टांगों में टेल लगाना शुरू किया. ससुर जी का तना हुआ लौड़ा उसके मुंह से सिर्फ कुछ इंच ही दूर था. कंचन का मन कर रहा था की उस मोटे मूसल को चूम ले.

रामलाल – बहु थोड़ा हमारी छाती पे भी मालिश कर दो.

ससुर जी की छाती पे मालिश करने के लिए कंचन को भी खड़ा होना पड़ा. लेकिन ससुर जी का तना हुआ लंड उसे नज़दीक नहीं आने दे रहा था. वो ससुर जी को छेड़ते हुए हंसती हुई बोली..

कंचन – पिता जी आपका गधे जैसा वो तो हमें नज़दीक आने ही नहीं दे रहा, आपकी छाती पे कैसे मालिश करें?

रामलाल – तुम कहो तो काट दें इसे बहु?

कंचन – हाय राम! ये तो इतना प्यारा है, इसे नहीं काटने देंगे हम. कंचन ससुरजी के लौड़े को बड़े प्यार से सहलाती हुई बोली.

रामलाल – तो फिर हमें कुछ और सोचना पड़ेगा.

कंचन – हाँ पिताजी कुछ करिये न. आपका ये तो बहुत प्रॉबलम कर रहा है.

रामलाल – ठीक है बहु हम ही कुछ करते हैं.

ये कहते हुए रामलाल ने बहु के पेटीकोट का नाड़ा खींच दिया. नाड़ा खुलते ही पेटीकोट बहू की टांगों में गिर गया. दुसरे ही पल रामलाल ने बहु की बगलों में हाथ डाल के उसे ऊपर उठा लिया और खींच के अपनी बाहों में जकड़ लिया. इससे पहले की कंचन की कुछ समझ में आता उसने अपने आप को ससुर जी की छाती से चिपका पाया. वो सिर्फ ब्लाउज और पैंटी में थी. उसका पेटीकोट पीछे ज़मीन पे पड़ा हुआ था. ससुरजी का विशाल लंड उसकी टांगों के बीच ऐसे फंसा हुआ था जैसे वो उसकी सवारी कर रही हो.

उई माँ….. पिता जी…. ये आपने क्या किया? छोड़िये ना हमें. कंचन अपने आप को छुड़ाने का नाटक करती हुई बोली.

रामलाल – तुमही ने तो कहा था की हमारा लंड तुम्हें नज़दीक नहीं आने दे रहा है. देखो न अब प्रॉब्लम दूर हो गयी.

कंचन – सच आप तो बड़े खराब हैं. अपनी बहु का पेटीकोट कोई ऐसे उतारता है?

रामलाल – मजबूरी थी बहु उतारना पड़ा. तुम्हारा पेटीकोट तुम्हें नज़दीक नहीं आने देता. लेकिन अब देखो न तुम हमारे कितनी नज़दीक आ गई हो.

रामलाल दोनों हाथों से बहु के विशाल चूतड़ों को दबा रहा था. बेचारी छोटी सी कच्छी मोटे मोटे चूतड़ों की दरार में घुसी जा रही थी. रामलाल के मोटे लौड़े ने बहु की कच्छी के कपड़े को सामने से भी उसकी चूत की दोनों फांकों के बीच में घुसेड़ दिया था. कंचन को रामलाल के लंड की गर्माहट बेचैन कर रही थी. इतने दिनों से जिस लंड के सपने ले रही थी वो आज उसकी जांघों के बीच फँसा हुआ उसकी चूत से रगड़ खा रहा था.

कंचन – आए हाय! कितने मजबूर हैं आप जो आपको अपनी बहु का पेटीकोट उतारना पड़ा. लेकिन ऐसे चिपके हुए हम आपकी छाती की मालिश कैसे कर सकते हैं? छोड़िये ना हमें प्लीज..

रामलाल – कोई बात नहीं बहु छाती पे नहीं तो पीठ पे तो मालिश कर सकती हो.

कंचन ससुर जी के बदन से बैल की तरह लिपटी हुई थी. उसका सिर ससुर जी की छाती पे टिका हुआ था. उसने दोनों हाथों से पीठ की मालिश शुरू कर दी. रामलाल भी बहु की पीठ और चूतड़ों पे हाथ फेर रहा था. रामलाल के लौड़े से रगड़ खा के कंचन की चूत बुरी तरह गीली हो गयी थी और पैंटी भी बिलकुल उसके रस में भीग गई थी. रामलाल के लंड का ऊपरी भाग बहु की चूत के रस में भीगा हुआ था. कंचन का सारा बदन वासना की आग में जल रहा था. Sasur bahu xxx sex story

रामलाल – बहु तुम हमारी पीठ की मालिश करो हम भी तुम्हारी पीठ की मालिश कर देते हैं.

रामलाल ने अपने हाथों में तेल ले कर बहू की पीठ पे मलना शुरू कर दिया. धीरे धीरे उसने बहु के विशाल नितंबों पे से उसकी पैंटी को उनके बीच की दरार में सरका दिया और दोनो नितम्बों की दबा दबा के मालिश करने लगा. कंचन के मुंह से हल्की हलकी सिसकारियाँ निकल रही थी. पीठ पे मालिश करने के बहाने धीरे धीरे रामलाल ने बहु के ब्लाउज़ के हुक खोल के ब्रा का हुक भी खोल दिया. कंचन को महसूस तो हो रहा था की शायद ससुर जी उसके ब्लाउज़ और ब्रा का हुक खोल रहे हैं लेकिन वो अनजान बनी रही. जब सासुर जी ने उसके ब्लाउज और ब्रा को उतारना शुरू किया तो वो हड्बड़ा के बोली..

कंचन – हाय राम! पिता जी… ये क्या कर रहे हैं? हमारा ब्लाउज क्यों उतार रहे हैं?

आगे की कहानी यहाँ पढ़ें ==>> प्यासी बहु, ठरकी ससुर और गधे का लंड भाग – 4

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8 thoughts on “प्यासी बहु, ठरकी ससुर और गधे का लंड भाग -3”

  1. सीमा वाणी

    रामलाल को चड्डी पहले निकलना चाहिये।फिर पेटीकोट में जो नारा के नीचे खुली जगह से चूत में लन्ड डालकर माज़ा लेनी चहिये थी बेचारी पेटीकोट लन्ड के पानी के लिये तरसती है।

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