प्यासी बहु, ठरकी ससुर और गधे का लंड भाग -1

Sasur bahu sex story hindi:- कंचन की शादी को दो साल हो चुके थे. बचपन से ही कंचन बहुत खूबसूरत थी. 12 साल की उम्र में ही जिस्म खिलने लग गया था. सोलहवां साल लगते लगते तो कंचन की जवानी पूरी तरह निखर आयी थी. ऐसा लगता ही नहीं था की अभी दसवीं क्लास में पढ़ती है. स्कूल की स्कर्ट में उसकी भरी भरी जांघें लड़कों पे कहर ढाने लगी थी. स्कूल के लड़के स्कर्ट के नीचे से झाँक कर कंचन की पैंटी की एक झलक पाने के लिए पागल रहते थे. कभी कभार जब बास्केटबॉल खेलते हुए या कभी हवा के झोंके से कंचन की स्कर्ट उठ जाती, तो किस्मत वालों को उसकी पैंटी के दर्शन हो जाते. लड़के तो लड़के स्कूल के टीचर भी कंचन की जवानी के असर से नहीं बचे थे. कंचन के भारी नितंब पतली कमर और उभरती चूची देखके उनके सीने पे छुरियाँ चल जाती. कंचन को भी अपनी जवानी पे नाज़ था. वो भी लोगों का दिल जलाने में कोई कसर नहीं छोड़ती थी.

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उन्नीस साल की होते ही कंचन की शादी हो गयी. कंचन ने शादी तक अपने कुंवारे बदन को संभाल के रखा था. उसने सोच रखा था की उसका कुंवारा बदन ही उसके पति के लिए सुहागरात को एक अनमोल तोह्फा होगा. सुहाग रात को पति का मोटा लंबा लंड देख कर कंचन के होश उड़ गए थे. उस मोटे लंड ने कंचन की कुंवारी चूत लहुलुहान कर दी थी. शादी के बाद कुछ दिन तो कंचन का पति उसे रोज़ चार पांच बार चोदता था. कंचन भी एक लंबा मोटा लौड़ा पा कर बहुत खुश थी. लेकिन धीरे धीरे चुदाई कम होने लगी और शादी के एक साल बाद तो ये नौबत आ गयी थी, की महीने में मुश्किल से एक दो बार ही कंचन की चुदाई होती. हालांकि कंचन ने सुहागरात को अपने पति को अपनी कुंवारी चूत का तोहफा दिया था, लेकिन वो बचपन से ही बहुत कामुक लड़की थी. बस किसी तरह अपनी वासना को कण्ट्रोल करके अपने स्कूल और कॉलेज के लड़कों और टीचर्स से शादी तक अपनी चूत को बचा के रखने में सफल हो गयी थी. महीने में एक दो बार की चुदाई से कंचन की वासना की प्यास कैसे बुझती उसे तो एक दिन में कम से कम तीन चार बार चुदाई की ज़रुरत थी.

आखिकार जब कंचन का पति जब तीन महीने के लिए टूर पे गया तो कंचन के देवर ने उसके अकेलेपन का फायदा उठा कर उसकी वासना को तृप्त किया. अब तो कंचन का देवर रामु कंचन को रोज़ चोदकर उसकी प्यास बुझाता था. एक दिन गाँव से टेलीग्राम आया की सास की तबियत कुछ खराब हो गयी है. कंचन के ससुर एक बड़े ज़मींदार थे. गाँव में उनकी काफी खेती थी. कंचन का पति राजेश काम के कारण नहीं जा सकता था और देवर रामु का कॉलेज था. कंचन को ही गाँव जाना पड़ा. वैसे भी वहां कंचन की ही ज़रुरत थी जो सास और ससुर दोनों का ख्याल कर सके और सास की जगह घर को संभाल सके. कंचन शादी के फौरन बाद अपने ससुराल गयी थी. सास ससुर की खूब सेवा करके कंचन ने उन्हें खुश कर दिया था. कंचन की खूबसूरती और भोलेपन से दोनों ही बहुत प्रभावित थे. कंचन की सास माया देवी तो उसकी प्रशंसा करते नहीं थकती थी. दोनों इतनी सुंदर सुशील और मेहनती बहु से बहुत खुश थे. बात बात पे शर्मा जाने की अदा पे तो ससुर रामलाल फ़िदा थे. उन्होंने ख़ास कर कंचन को कम से कम दो महीने के लिए भेजने को कहा था. Sasur bahu sex story hindi

दो महीने सुनकर कंचन का कलेजा धक् रह गया था. दो महीने बिना चुदाई के रहना बहुत मुश्किल था. यहाँ तो पति की कमी उसका देवर रामु पूरी कर देता था. गाँव में दो महीने तक क्या होगा ये सोच सोच कर कंचन परेशान थी लेकिन कोई चारा भी तो नहीं था. जाना तो था ही. राजेश ने कंचन को कानपूर में ट्रैन में बैठा दिया. अगले दिन सुबह ट्रैन गोपालपुर गाँव पहुँच गयी जो की कंचन की ससुराल थी. कंचन ने चूड़ीदार पहन रखा था. कुरता कंचन के घुटनों से करीब आठ इंच ऊपर था और कुर्ते के दोनों साइड का कटाव कमर तक था. चूड़ीदार कंचन के नितम्बों तक टाइट था. चलते वक़्त जब कुर्ते का पल्ला आगे पीछे होता या हवा के झोंके से उठ जाता तो टाइट चूड़ीदार में कसी कंचन की टांगें मदहोश कर देने वाली मांसल जांघें और विशाल नितम्ब बहुत ही सेक्सी लगते. ट्रैन में सब मर्दों की नज़रें कंचन की टांगों पर लगी हुई थी. स्टेशन पर कंचन को लेने सास और ससुर दोनों आए हुए थे. कंचन अपने ससुर से पर्दा करती थी इसलिए उसने चुन्नी का घूँघट अपने सर पे ले लिया.

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अभी तक जो चुन्नी कंचन की छातियों के उभार को छुपा रही थी अब उसके घूँघट का काम करने लगी. कंचन की बड़ी बड़ी छातियाँ स्टेशन पे सबका ध्यान खींच रही थी. कंचन ने झुक के सास के पाओं छूए. जैसे ही कंचन पाऊँ छूने के लिए झुकी रामलाल को उसकी चूड़ीदार में कसी मांसल जांघें और नितम्ब नज़र आने लगे. रामलाल का दिल एक बार तो धड़क उठा. शादी के बाद से बहु की खूबसूरती को चार चाँद लग गए थे. बदन भर गया था और जवानी पूरी तरह निखर आई थी. रामलाल को साफ़ दिख रहा था की बहु का टाइट चूड़ीदार और कुरता बड़ी मुश्किल से उसकी जवानी को समेटे हुए थे. सास से आशीर्वाद लेने के बाद कंचन ने ससुरजी के भी पैर छूए. रामलाल ने बहु को प्यार से गले लगा लिया. बहु के जवान बदन का स्पर्श पाते ही रामलाल कांप गया. कंचन की सास माया देवी बहु के आने से बहुत खुश थी. स्टेशन के बाहर निकल कर उन्होंने तांगा किया. पहले माया देवी तांगे पे चढ़ी. उसके बाद रामलाल ने बहु को चढ़ने दिया. रामलाल को मालूम था की जब बहु तांगे पे चढ़ने के लिए टांग ऊपर करेगी तो उसे कुर्ते के कटाव में से बहु की पूरी टांग और नितम्ब भी देखने को मिल जाएंगे. वही हुआ, जैसे ही कंचन ने तांगे पे बैठने के लिए टांग ऊपर की, रामलाल को चूड़ीदार में कसी बहु की सेक्सी टांगों और भारी चूतड़ों की झलक मिल गयी.

यहां तक की रामलाल को चूड़ीदार के सफ़ेद महीन कपड़े में से बहु की कच्छी (पैंटी) की भी झलक मिल गयी. बहु ने गुलाबी रंग की कच्छी पहन रखी थी. अब तो रामलाल का लंड भी हरकत करने लगा. उसने बड़ी मुश्किल से अपने को संभाला. रामलाल को अपनी बहु के बारे में ऐसा सोचते हुए अपने ऊपर शर्म आ रही थी. वो सोच रहा था की मैं कैसा इंसान हूँ जो अपनी ही बहु को ऐसी नजरों से देख रहा हूँ. बहु तो बेटी के सामान होती है. लेकिन क्या करता, था तो मरद ही. घर पहुँच कर सास ससुर ने बहु की खूब खातिरदारी की. गाँव में आ कर अब कंचन को 15 दिन हो चुके थे. सास की तबियत खराब होने के कारण कंचन ने सारा घर का काम संभाल लिया था. उसने सास ससुर की खूब सेवा करके उन्हें खुश कर दिया था. गाँव में औरतें लहंगा चोली पहनती थी इसलिए कंचन ने भी कभी कभी लहंगा चोली पहनना शुरू कर दिया. लहंगे चोली ने तो कंचन की जवानी पे चार चाँद लगा दिए. गोरी पतली कमर और उसके नीचे फैलते हुए भारी नितम्बों ने तो रामलाल का जीना हराम कर रखा था. कंचन का ससुर रामलाल एक लम्बा तगड़ा आदमी था.

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अब उसकी उम्र करीब 55 साल हो चली थी. जवानी में उसे पहलवानी का शौक था. आज भी उसका जिस्म बिलकुल गठा हुआ था. रोज़ लंगोट बाँध के कसरत करता था और पूरे बदन की मालिश करवाता था. सबसे बड़ी चीज़ जिस पर उसे बहुत नाज़ था वो थी उसके मसल्स और उसका 11 इंच लम्बा फौलादी लंड. लेकिन रामलाल की बदकिस्मती ये थी की उसकी पत्नी माया देवी उसकी वासना की भूख कभी शांत नहीं कर सकी. माया देवी धार्मिक स्वभाव की थी. उसे सेक्स का कोई शौक नहीं था. रामलाल के मोटे लम्बे लौड़े से डरती भी थी क्योंकि हर बार चुदाई में बहुत दर्द होता था. वो मज़ाक में रामलाल को गधा कहती थी. पत्नी की बेरुखी के कारण रामलाल को अपने जिस्म की भूख मिटाने के लिए दूसरी औरतों का सहारा लेना पड़ा. रामलाल के खेतों में कई औरतें काम करती थी. इन मज़दूर औरतों में से सुंदर और जवान औरतों को पैसे का लालच दे कर अपने खेत के पंप हाउस में चोदता था. जिन औरतों को रामलाल ने एक बार चोद दिया वो तो मानो उसकी गुलाम बन जाती थी. आखिर ऐसा लम्बा मोटा लंड बहुत किस्मत वाली औरतों को ही नसीब होता है.

तीन चार औरतें तो पहली चुदाई में बेहोश भी हो गयी. दो औरतें तो ऐसी थी जिनकी चूत रामलाल के फौलादी लौड़े ने सचमुच ही फाड़ दी थी. अब तक रामलाल कम से कम बीस औरतों को चोद चुका था. लेकिन रामलाल जानता था की पैसा दे कर चोदने में वो मज़ा नहीं जो लड़की को पता के चोदने में है. आज तक चुदाई का सबसे ज़्यादा मज़ा उसे अपनी साली को चोदने में आया था. माया देवी की बहन सीता, माया देवी से 10 साल छोटी थी. रामलाल ने जब उसे पहली बार चोदा उस वक़्त उसकी उम्र 18 साल की थी. कॉलेज में पढ़ती थी. गर्मिओं की छुट्टी बिताने अपने जीजू के पास आई थी. बिलकुल कुंवारी चूत थी. रामलाल ने उसे भी खेत के पंप हाउस में ही चोदा था. रामलाल के मूसल ने सीता की कुंवारी नाज़ुक सी चूत को फाड़ ही दिया था. सीता बहुत चिल्लाई थी और फिर बेहोश हो गयी थी. उसकी चूत से बहुत खून निकला था. रामलाल ने सीता के होश में आने से पहले ही उसकी चूत का सारा खून साफ़ कर दिया था ताकि वो डर न जाए. रामलाल से चुदने के बाद सीता सात दिन ठीक से चल भी नहीं पाई और जब ठीक से चलने लायक हुई तो शहर चली गयी. लेकिन ज़्यादा दिन शहर में नहीं रह सकी.

रामलाल के फौलादी लौड़े की याद उसे फिर से अपने जीजू के पास खींच लायी. इस बार तो सीता सिर्फ जीजू से चुदवाने ही आई थी. रामलाल ने तो समझा था की साली जी नाराज़ हो कर चली गयी. आते ही सीता ने रामलाल को कहा..

सीता – जीजू मैं सिर्फ आपके लिए ही आई हूँ.

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उसके बाद तो करीब रोज़ ही रामलाल सीता को खेत के पंप हाउस में चोदता था. सीता भी पूरा मज़ा लेकर चुदवाती थी. रामलाल के खेत में काम करने वाली सभी औरतों को पता था की जीजा जी साली की खूब चुदाई कर रहे हैं. ये सिलसिला करीब चार साल चला. सीता की शादी के बाद रामलाल फिर खेत में काम करने वालिओं को चोदने लगा. लेकिन वो मज़ा कहाँ जो सीता को चोदने में आता था. बड़े नाज़ नखरों के साथ चुदवाती थी. शादी के बाद एक बार सीता गाँव आई थी. मौका देख कर रामलाल ने फिर उसे चोदा. सीता ने रामलाल को बताया था की रामलाल के लम्बे मोटे लौड़े के बाद उसे पति के लंड से तृप्ति नहीं होती थी. सीता भी रामलाल को कहती..

सीता – जीजू आपका लंड तो सचमुच गधे के लंड जैसा है.

गाँव में गधे कुछ ज़्यादा ही थे. जहाँ नज़र डालो वहीँ चार पांच गधे नज़ारा जाते. कुछ दिन बाद सीता के पति और सीता दुबई चले गए. उसके बाद से रामलाल को कभी भी चुदाई से तृप्ति नहीं मिली. अब तो सीता को दुबई जा कर 20 साल हो चुके थे. रामलाल के लिए अब वो सिर्फ याद बन कर रह गयी थी. माया देवी तो अब पूजा पाठ में ही ध्यान लगाती थी. इस उम्र में खेत में काम करने वाली औरतों को भी चोदना मुश्किल हो गया था. अब तो जब कभी माया देवी की कृपा होती तो साल में एक दो बार उनको चोद कर ही काम चलाना पड़ता था. लेकिन माया देवी को चोदने में बिलकुल भी मज़ा नहीं आता था. धीरे धीरे रामलाल को विश्वास होने लगा था की अब उसकी चोदने की उम्र निकल गयी है. लेकिन जब से बहु घर आई थी रामलाल की जवानी की यादें फिर से ताज़ा हो गयी थी. बहु की जवानी तो सचमुच ही जान लेवा थी. सीता तो बहु के सामने कुछ भी नहीं थी. शादी के बाद से तो बहु की जवानी मानो बहु के ही काबू में नहीं थी. बहु के कपड़े बहु की जवानी को छुपा नहीं पाते थे.

जब से बहु आई थी रामलाल की रातों की नींद उड़ गयी थी. बहु रामलाल से पर्दा करती थी. मुंह तो ढक लेती थी लेकिन उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ खुली रहती थी. गोरा बदन, लम्बे काले घने बाल, बड़ी बड़ी छातियाँ, पतली कमर और उसके नीचे फैलते हुए चूतड बहुत जान लेवा थे. टाइट चूडीदार में तो बहु की मांसल टांगें रामलाल की वासना भड़का देती थी. कंचन, जी-जान से अपने सास ससुर की सेवा करने में लगी हुई थी. कंचन को महसूस होने लगा था की ससुरजी उसे कुछ अजीब सी नजरों से देखते हैं. वैसे भी औरतों को मर्द के इरादों का बहुत जल्दी पता लग जाता है. फिर वो अक्सर सोचती की शायद ये उसका वहम है. ससुर जी तो उसके पिता के सामान थे. एक दिन की बात है. कंचन ने अपने कपड़े धो कर छत पर सूखने डाल रखे थे. इतने में घने बादल छा गए. बारिश होने को थी. रामलाल कंचन से बोले –

रामलाल – बहु बारिश होने वाली है मैं ऊपर से कपडे ले आता हूँ.

कंचन – नहीं-नहीं पिताजी आप क्यों तकलीफ करते हैं मैं अभी जा के लाती हूँ.

उसे मालूम था की आज सिर्फ उसी के कपडे सूख रहे थे.

रामलाल- अरे बहु तुम सारा दिन इतना काम करती हो. इसमें तकलीफ कैसी? हमें भी तो कुछ काम करने दो.

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ये कह के रामलाल छत पे चल पड़ा. छत पे पहुँच के रामलाल को पता लगा की क्यों बहु खुद ही कपड़े लाने की जिद कर रही थी. डोरी पर सिर्फ दो ही कपड़े सूख रहे थे. एक बहु की कच्छी और एक उसकी ब्रा. रामलाल का दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा. कितनी छोटी सी कच्छी थी, बहु के विशाल नितम्बों को कैसे ढ़कती होगी. रामलाल से नहीं रहा गया और उसने कंचन की पैंटी को डोरी से उतार लिया और हाथों में पैंटी के मुलायम कपड़े को फील करने लगा. फिर उसने पैंटी को उस जगह से सूंघ लिया जहाँ कंचन की चूत पैंटी से टच करती थी. हालांकि पैंटी धुली हुई थी फिर भी रामलाल औरत के बदन की खुशबू पहचान गया. रामलाल मन ही मन सोचने लगा की अगर धुली हुई कच्छी में से इतनी मादक खूशबू आती है तो पहनी हुई कच्छी की गंध तो उसे पागल बना देगी. रामलाल का लौड़ा हरकत करने लगा. वो बहु की पैंटी और ब्रा लेकर नीचे आया, बहु ऊपर तो ये दो ही कपडे थे. ससुर के हाथ में अपनी पैंटी और ब्रा देखकर कंचन शर्म से लाल हो गयी. उसने घूँघट तो निकाल ही रखा था, इसलिए रामलाल उसका चेहरा नहीं देख सकता था. कंचन शर्माते हुए बोली..

कंचन- पिताजी इसीलिए तो मैं कह रही थी की मैं ले आती हूँ. आपने बेकार तकलीफ की.

रामलाल- नहीं बहु तकलीफ किस बात की? लेकिन ये इतनी छोटी सी कच्छी तुम्हारी है?

अब तो कंचन का चेहरा टमाटर की तरह सुर्ख लाल हो गया.

कंचन – जज…जी पिताजी!

कंचन सर नीचे किये हुए बोली.

रामलाल- लेकिन बहु ये तो तुम्हारे लिए बहुत छोटी है, इससे तुम्हारा कम चल तो जाता है न?

कंचन – जी पिताजी!

कंचन सोच रही थी की किसी तरह ये धरती फट जाए और मैं उसमे समा जाऊं.

रामलाल- बेटी इसमें शर्माने की क्या बात है, तुम्हारी उम्र में लड़कियों की कच्छी अक्सर बहुत जल्दी छोटी हो जाती है. गाँव में तो औरतें कच्छी पहनती नहीं हैं. अगर छोटी हो गयी है तो सासु माँ से कह देना शहर जा कर और खरीद देगी. हम गए तो हम ले आएँगे. लो ये सूख गयी है रख लो.

ये कह कर रामलाल ने कंचन को उसकी पैंटी और ब्रा दे दी. इस घटना के बाद रामलाल ने कंचन के साथ और खुल कर बातें करना शुरू कर दिया था। एक दिन माया देवी को शहर सत्संग में जाना था. रामलाल उनको ले कर शहर जाने वाला था. दोनों घर से सुबह स्टेशन की और चल पड़े. रास्ते में रामलाल के जान पहचान का लड़का कार से शहर जाता हुआ मिल गया. रामलाल ने कहा की आंटी को भी साथ ले जाओ. लड़का मान गया और माया देवी उसके साथ कार में शहर चली गयी. रामलाल घर वापस आ गया. दरवाज़ा अंदर से बन्द था. बाथरूम से पानी गिरने कीआवाज़ आ रही थी. शायद बहु नहा रही थी. कंचन तो समझ रही थी की सास ससुर शाम तक ही वापस लौटेंगे. रामलाल के कमरे का एक दरवाजा गली में भी खुलता था. रामलाल कमरे का ताला खोल के अपने कमरे में आ गया. उधर कंचन बेखबर थी. वो तो समझ रही थी कि घर में कोई नहीं है. नहा कर कंचन सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज़ में ही बाथरूम से बाहर निकल आई. उसका बदन अब भी गीला था. बाल भीगे हुए थे. कंचन अपनी पैंटी और ब्रा जो अभी उसने धोई थी सुखाने के लिए आँगन में आ गयी.

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रामलाल अपने कमरे के परदे के पीछे से सारा नज़ारा देख रहा था. बहु को पेटीकोट और ब्लाउज़ में देख कर रामलाल को पसीना आ गया. क्या बला की खूबसूरत थी बहू. बहुत कसा हुआ पेटीकोट पहनती थी. बदन गीला होने के कारण पेटीकोट उसके चूतड़ों से चिपका जा रहा था. बहु के फैले हुए चूतड पेटीकोट में बड़ी मुश्किल से समा रहे थे. बहु का मादक रूप मानो उसके ब्लाउज और पेटीकोट में से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था. उफ क्या गदराया हुआ बदन था. बहु ने अपनी धुली हुई कच्छी और ब्रा डोरी पर सूखने को डाल दी. अचानक वो कुछ उठाने के लिए झुकी तो पेटीकोट उसके विशाल चूतड़ों पर कस गया. पेटीकोट के सफ़ेद कपड़े में से रामलाल को साफ़ दिख रहा था की आज बहु ने काले रंग की कच्छी पहन रखी है. उफ बहु के सिर्फ बीस प्रतिशत चूतड ही कच्छी में थे बाकी तो बाहर गिर रहे थे. जब बहु सीधी हुई तो उसकी कच्छी और पेटीकोट उसके विशाल चूतड़ों के बीच में फँस गए. अब तो रामलाल का लौड़ा फनफनाने लगा. उसका मन कर रहा था की वो जा कर बहु के चूतड़ों की दरार में फँसी पेटीकोट और कच्छी को खींच के निकाल दे. बहु ने मानो रामलाल के दिल की आवाज़ सुन ली. उसने अपनी चूतड़ों की दरार में फंसे पेटीकोट को खींच के बाहर निकाल लिया.

बहु आँगन में खड़ी थी इसलिए पेटीकोट में से उसकी मांसल टांगें भी नज़र आ रही थी. रामलाल के लंड में इतना तनाव सीता को चोदते वक़्त भी नहीं हुआ था. बहु के सेक्सी चूतड़ों को देख के रामलाल सोचने लगा की इसकी गांड मार के तो आदमी धन्य हो जाए. रामलाल ने आज तक किसी औरत की गांड नहीं मारी थी. असलियत तो ये थी की रामलाल का गधे जैसा लौड़ा देख कर कोई औरत गांड मरवाने के लिए राज़ी ही नहीं थी. माया देवी तो चूत ही बड़ी मुश्किल से देती थी, गांड देना तो बहुत दूर की बात थी. एक दिन कंचन ने खेतों में जाने की इच्छा प्रकट की. उसने सासु माँ से कहा..

कंचन – मम्मी जी मैं खेतों में जाना चाहती हूँ अगर आप इज़ाज़त दें तो आपके खेत और फसल देख आऊं. शहर में तो ये देखने को मिलता नहीं है.

सास – अरे बेटी इसमें इज़ाज़त की क्या बात है? तुम्हारे ही खेत हैं जब चाहो चली जाओ. मैं अभी तुम्हारे ससुर जी से कहती हूँ, तुम्हें खेत दिखाने ले जाएं.

कंचन – नहीं नहीं मम्मी जी आप पिताजी को क्यों परेशान करती हैं मैं अकेली ही चली जाउंगी.

सास – इसमें परेशान करने की क्या बात है? कई दिन से ये भी खेत नहीं गए हैं तुझे भी साथ ले जाएंगे. जाओ तुम तैयार हो जाओ. और हाँ लहंगा चोली पहन लेना खेतों में जाने के लिए वही ठीक रहता है.

कंचन तैयार होने गयी.

माया देवी ने रामलाल को कहा अजी सुनते हो आज बहु को खेत दिखा लाओ. कह रही थी मैं अकेली ही चली जाती हूँ. मैंने ही उसको रोका और कहा ससुरजी तुझे ले जाएंगे.

रामलाल- ठीक है मैं ले जाऊँगा लेकिन अकेली भी चली जाती, तो क्या हो जाता। गाँव में किस बात का डर?

माया देवी – कैसी बातें करते हो जी? जवान बहु को अकेले भेजना चाहते हो. अभी नादाँन है. अपनी जवानी तो उससे संभाली नहीं जाती अपने आप को क्या संभालेगी?

इतने में कंचन आ गयी. लहंगा चोली में बला की खूबसूरत लग रही थी.

कंचन – चलिए पिताजी मैं तैयार हूँ.

रामलाल- चलो बहु हम भी तैयार हैं.

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ससुर और बहु दोनों खेत की ओर निकल पड़े. कंचन आगे आगे चल रही थी और रामलाल उसके पीछे. कंचन ने घूंघट निकाल रखा था. रामलाल बहु की मस्तानी चाल देख कर पागल हुआ जा रहा था. बहु की पतली गोरी कमर बल खा रही थी. उसके नीचे फैले हुए मोटे मोटे चूतड चलते वक़्त ऊपर नीचे हो रहे थे. लहंगा घुटनों से थोड़ा ही नीचे था. बहु की गोरी गोरी टांगें और चूतड़ों तक लटकते लम्बे घने काले बाल रामलाल की दिल की धड़कन बढ़ा रहे थे. ऐसा नज़ारा तो रामलाल को ज़िन्दगी में पहले कभी नसीब नहीं हुआ. रामलाल की नज़रें बहु के मटकते हुए मोटे मोटे चूतड़ों और पतली बलखाती कमर पर ही टिकी हुई थी. उन जानलेवा चूतड़ों को मटकते देखकर रामलाल की आँखों के सामने उस दिन का नज़ारा घूम गया, जिस दिन उसने बहु के चूतड़ों के बीच उसके पेटीकोट और कच्छी को फंसे हुए देखा था. रामलाल का लौड़ा खड़ा होने लगा. कंचन घूंघट निकाले आगे आगे चली जा रही थी. वो अच्छी तरह जानती थी की ससुर जी की आँखें उसके मटकते हुए नितम्बों पे लगी हुई हैं. रास्ता संकरा हो गया था और अब वो दोनों एक पगडंडी पे चल रहे थे. अचानक साइड की पगडंडी से दो गधे कंचन के सामने आ गए. रास्ता इतना कम चौड़ा था की साइड से आगे निकलना भी मुश्किल था. मजबूरन कंचन को गधों के पीछे पीछे चलना पड़ा.

अचानक कंचन का ध्यान पीछे वाले गधे पे गया.

कंचन – अरे पिताजी देखिये ये कैसा गधा है इसकी तो पांच टांगें हैं.

कंचन आगे चल रहे गधे की और इशारा करते हुए बोली.

रामलाल- बेटी तुम तो बहुत भोली हो ज़रा ध्यान से देखो इसकी पांच टांगें नहीं हैं.

कंचन ने फिर ध्यान से देखा तो उसका कलेजा धक् सा रह गया. गधे की पांच टांगें नहीं थी वो तो गधे का लंड था. बाप रे क्या लम्बा लंड था, ऐसा लग रहा था, जैसे उसकी टांग हो. कंचन ने ये भी नोटिस किया की आगे वाला गधा गधा नहीं बल्कि गधी थी, क्योंकि उसका लंड नहीं था. गधे का लंड खड़ा हुआ था. कंचन समझ गयी की गधा क्या करने वाला था. अब तो कंचन के पसीने छूट गए. पीछे पीछे ससुर जी चल रहे थे. कंचन अपने आप को कोसने लगी की, ससुर जी से क्या सवाल पूछ लिया. कंचन का शर्म के मारे बुरा हाल था. रामलाल को अच्छा मौका मिल गया था. उसने फिर से कहा..

रामलाल- बोलो बहु हैं क्या इसकी पांच टांगें है?

कंचन का मुंह शर्म से लाल हो गया और हकलाती हुई बोली..

कंचन -जज…जी चार ही हैं.

रामलाल – तो वो पांचवी चीज़ क्या है बहु?

कंचन – जज….जी वो तो ……..जी हमें नहीं पता.

रामलाल- पहले कभी देखा नहीं बेटी? रामलाल मज़े लेता हुआ बोला..

कंचन – नही पिताजी.. कंचन शर्माते हुए बोली।

रामलाल – मर्दों की टांगों के बीच में जो होता है वो तो देखा है?

कंचन – जी.. अब तो कंचन का मुंह लाल हो गया.

रामलाल – अरे बहु जो चीज़ मर्दों की टांगों के बीच में होती है ये वही चीज़ तो है.

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रामलाल कंचन के साथ इस तरह की बातें कर ही रहा था कि वही हुआ जो कंचन मन ही मन सोच रही थी, गधे ने आगे चल रही गधी के पीछे से उसकी फुद्दी मे अपना लंबा लौडा पेल दिया. कंचन का ये देखकर बुरा हाल हो गया। कुछ दिनों बाद कंचन के पति का फ़ोन आया. ससुर जी ने कंचन को बताया की राकेश का फ़ोन है. कंचन ने अपने कमरे में जाकर फोन का रिसीवर उठा लिया. उधर रामलाल ने भी अपने कमरे का रिसीवर नीचे नहीं रखा और बहु और बेटे की बातें सुनने लगा. राकेश बोल रहा था…

राकेश – कंचन मेरी जान ससुराल जा कर तो तुम हमें भूल ही गयी हो. अब तो एक महीना बीत गया है और कितना तडपाओगी? बहुत याद आ रही है तुम्हारी.

कंचन – अच्छा जी आज बड़ी याद आ रही है आपको मेरी! अचानक इतनी याद क्यों आ रही है?

राकेश – खूबसूरत बीवी से एक महीना अलग रहना तो बहुत मुश्किल होता है मेरी जान. सच सारा दिन खड़ा रहता है तुम्हारी याद में.

कंचन – आपका वो तो पागल है. उसे कहिये एक महीना और इंतज़ार करे.

राकेश – ऐसे न कहो मेरी जान एक महीना और इंतज़ार करना तो बहुत मुश्किल है.

कंचन – तो फिर अभी कैसे काम चल रहा है?

राकेश – अभी तो मैं तुम्हारी पैंटी से ही काम चला रहा हूँ.

कंचन – ओहो… आपने फिर मेरी पैंटी ले ली. जिस दिन वहां से चली थी उस दिन सुबह नहाने से पहले पैंटी उतारी थी. सोचा था गाँव में जा के धो लूँगी. गन्दी ही सूटकेस में रख ली थी. यहां आ के देखा तो पैंटी गायब थी.

राकेश – बड़ी मादक खुशबू है तुम्हारी पैंटी की. याद है पहली रात को उतावलेपन में जब पहली बार तुम्हें चोदा था तो पैंटी उतारने की भी फुरसत नहीं थी, बस चूत के ऊपर से पैंटी को साइड में करके ही पेल दिया था तुम्हारी फूली हुई चूत में.

कंचन – अच्छी तरह याद है मेरे राजा. अब आप इस पैंटी को भी फाड़ दोगे? अब तक दो पैंटी तो पहले ही फाड़ चुके हो.

राकेश – कंचन मेरी जान इस बार आओगी तो पैंटी नहीं तुम्हारी चूत ही चोद के फाड़ दूंगा.

कंचन – सच! मैं भी तो यही चाहती हूँ.

राकेश – क्या चाहती हो मेरी जान?

कंचन – की आप मेरी.. हटिये भी.. आप बहुत चालाक हैं.

राकेश – बोलो ना मेरी जान फ़ोन पे भी शर्मा रही हो.

कंचन – आप तो बस मेरे मुंह से गन्दी गन्दी बातें सुनना चाहते हैं.

राकेश – जब चुदवाने में कोई शर्म नहीं तो बोलने में कैसी शर्म? तुम्हारे मुंह से सुनके शायद मेरे लंड को कुछ शांति मिले. बोलो न मेरी जान तुम भी क्या चाहती हो?

कंचन – उफ…! आप भी बस. मैं भी तो चाहती हूँ की आप मुझे इतना चोदें कि मेरी….. मेरी चूत फट जाए. मेरी चूत अब आपके उसके लिए बहुत तड़प रही है.

राकेश – किसके लिए मेरी जान.

कंचन – आपके लल.. लंड के लिए और किसके लिए. कंचन मुस्कुराते हुए बोली.

राकेश – सच कंचन अब और नहीं सहा जाता. मालूम है इस वक़्त भी तुम्हारी पैंटी मेरे खड़े हुए लंड पे लटक रही है.

कंचन – हाय राम मेरी पैंटी की किस्मत भी मेरी चूत की किस्मत से अच्छी है. अगर आपने मुझे पहले ही बुला लिया होता तो इस वक़्त आपके लंड पे पैंटी नहीं मेरी चूत होती.

राकेश – कोई बात नहीं इस बार जब आओगी तो इतना चोदूँगा कि तंग आ जाओगी. बोलो मेरी जान जी भर के दोगी ना?

कंचन – हाँ मेरे राजा आप लेंगे तो क्यों नहीं दूँगी. मैंने तो सिर्फ टांगें चौड़ी करनी हैं बाकी सारा काम तो आप ही ने करना है.

राकेश – ऐसा न कहो मेरी जान, चूत देने की कला तो कोई तुमसे सीखे.

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कंचन – अच्छा जी! तो अपनी बीवी को चोदना इतना अच्छा लगता है? वैसे यहां एक औरत कमला है जो मालिश बहुत अच्छी करती है. मेरे पूरे बदन की मालिश करती है. यहां तक की मेरी चूत की भी मालिश कर दी. कहती है बहु रानी आपकी चूत की मालिश करके मै इसे ऐसा बना दूँगी की आपके पति हमेशा आपकी चूत से ही चिपके रहेंगे. तो मैंने उससे कहा की मैं भी तो यही चाहती हूँ. वर्ना हमारे पति देव को तो हमारी चूत की याद महीने में एक दो बार ही आती है. ठीक कहा ना जी? उसने चूत के बालों पे भी कुछ किया है.

राकेश – क्या किया है मेरी जान बताओ न.

कंचन – मैं क्यों बताऊँ? खुद ही देख लीजियेगा. लेकिन चूत पे से पैंटी साइड में करके पेलने से नहीं पता चलेगा. ये देखने के लिए तो पूरी नंगी करके ही चोदना पड़ेगा.

राकेश – एक बार आ तो जाओ मेरी जान अब कपड़ों की ज़रुरत नहीं पड़ेगी. हमेशा नंगी ही रखूँगा.

कंचन – हाय ऐसी बातें न करिये. मेरी चूत बिलकुल गीली हो गयी है. आपके पास तो मेरी पैंटी है मेरे पास तो कुछ भी नहीं है.

राकेश – वहां गाँव में किसी को ढून्ढ लो. राजेश मज़ाक करता हुआ बोला.

कंचन – छी कैसी बातें करते हैं? वैसे आपके गाँव में आदमी कम गधे ज्यादा नज़र आते हैं. एक दिन तो हद ही हो गयी. मैं खेत में जा रही थी. मेरे आगे आगे एक गधा और गधी चल रहे थे. गधे का लंड खड़ा हुआ था. बाप रे! तीन फुट से भी लम्बा होगा. बिलकुल ज़मीं पे लगने को हो रहा था. अचानक वो आगे चल रही गधी पर चढ़ गया और पूरा तीन फुट का लंड उसकी चूत में पेल दिया. सच मेरी तो चीख ही निकल गयी. ज़िन्दगी में पहली बार इतना लम्बा लंड किसी के अंदर जाता देखा.

राकेश – तुम अपना ध्यान रखना मेरी जान. खेतों में अकेली मत जाना. तुम्हारे कातिलाना चूतड़ों को देख के कोई गधा तुमपे न चढ़ जाए. कहीं तुम्हारी चूत में तीन फुट का लंड पेल दिया तो? राजेश हँसता हुआ बोला.

कंचन – हटिये आप तो बड़े वो हैं आपको तो शर्म भी नहीं आती. जिस दिन सचमुच किसी गधे ने मेरे अंदर तीन फुट का लंड पेल दिया ना उस दिन के बाद मेरी चूत इतनी चौड़ी हो जाएगी की आपके काबिल नहीं रह जाएगी. बोलिये मंज़ूर है?

राकेश – अगर तुम्हारी चूत की प्यास गधे के लंड से बुझ जाती है तो मुझे मंज़ूर है. मैं तो तुम्हें खुश और तुम्हारी चूत को तृप्त देखना चाहता हूँ.

कंचन – जाईये भी हम आपसे नहीं बोलते.

राकेश – नाराज़ मत हो मेरी जान मैं तो मज़ाक कर रहा था.

कंचन – अच्छा अब फ़ोन रखिये मुझे खाना भी बनाना है.

राकेश – ठीक है मेरी जान दो तीन दिन बाद फिर फ़ोन करूँगा. बाय.

राजेश ने फ़ोन रख दिया. राजेश की बातें सुन कर कंचन की चूत गीली हो गयी थी. वो रिसीवर रखने ही वाली थी की उसे एक और क्लिक की आवाज़ सुनाई दी. ज़रूर कोई और भी उनकी बातें सुन रहा था. कंचन के घर तो एक्सटेंशन था नहीं. फ़ोन का एक्सटेंशन तो यहीं ससुराल में था. वो भी ससुर जी के कमरे में. तो क्या ससुर जी उनकी बातें सुन रहे थे? बाप रे अगर ससुर जी ने उनकी बातें सुन ली तो क्या सोच रहे होंगे? उधर रामलाल बहु के मुंह से ऐसी सेक्सी बातें सुनकर हैरान रह गया. आखिर बहु उतनी भी भोली नहीं थी जितनी शक्ल से लगती थी. अब रामलाल बहु को छुप छुप के देखने के चक्कर में रहता था. एक रात कंचन देर तक जग रही थी. शायद नावेल पढ़ रही थी. सब लोग सो गए थे. रामलाल की आँखों में नींद कहाँ? वो बिस्तर पर लाइट करवटें बदल रहा था. तभी उसे बहु के कमरे में हरकत सुनाई दी. रामलाल दरवाजे से देखने लगा. तभी बहु के कमरे का दरवाज़ा खुला और वो रामलाल के कमरे के बगल वाले बाथरूम की ओर जा रही थी. बहु के हाथ में कोई सफ़ेद सी चीज़ थी. ऐसा लग रहता जैसे उसकी कच्छी हो.

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बहु ने बाथरूम में घुस के दरवाज़ा बंद कर लिया. रामलाल जल्दी से दबे पाऊँ उठा और बाथरूम के दरवाज़े से कान लगा कर सुनने लगा. इतने में पिसससससससस………………… की आवाज आने लगी. बहु पेशाब कर रही थी. बहु के पेशाब के लिए पैर फैला कर बैठने और उसकी चूत के खुले हुए होंठों के बीच से निकलती हुई पेशाब की धार की कल्पना से ही रामलाल का लौड़ा तन गया. जैसे ही पिससस….. की आवाज़ बन्द हुई रामलाल जल्दी से अपने कमरे में जा कर लेट गया. इतने में बहु बाथरूम से बाहर आई और अपने कमरे की ओर जाने लगी. उसके हाथ में वो सफ़ेद चीज़ अब नहीं थी. अपने कमरे में जा कर बहु ने दरवाज़ा बन्द कर लिया और लाइट भी ओफ़्फ़ कर दी, शायद सोने जा रही थी. रामलाल फिर से उठा और बाथरूम में गया. उसका गेस सही निकला, एक कोने में धोने के कपड़ों में बहु की सफ़ेद कच्छी पड़ी हुई थी.

रामलाल ने बाथरूम का दरवाज़ा अंदर से बन्द किया और बहु की कच्छी को उठा लिया. अभी तक उस कच्छी में गर्माहट थी. शायद अभी अभी उतारी थी. रामलाल ध्यान से कच्छी को देखने लगा. कच्छी में दो लम्बे काले बाल फँसे हुए थे. कम से कम चार इंच लम्बे तो थे ही. ये देख कर रामलाल का लंड हरकत करने लगा. बाप रे ये तो बहु की चूत के बाल थे. बाप रे बहु की चूत पे खूब लम्बे और घने बाल हैं. कच्छी का जो हिस्सा बहु की चूत पे टच करता था वहां गहरे रंग का दाग था. शायद बहु की पेशाब और चूत के रस का दाग था. रामलाल ने दोनो बाल निकाल लिए और कच्छी को सूंघने लगा. उफ क्या जानलेवा गंध थी. ये तो बहु की चूत की खुशबू थी. रामलाल औरत की चूत की गंध अच्छी तरह पहचानता था. रामलाल ने जी भर के बहु की कच्छी को सूंघा और फिर उस जगह को अपने लौड़े के सुपाड़े पे टिका दिया जो बहु की चूत से टच करती थी.

रामलाल ने कच्छी को अपने लंड पे खूब रगड़ा. उसे ऐसा महसूस हो रहा था मानो बहु की चूत पे अपना लंड रगड़ रहा हो. कच्छी इतनी नाज़ुक थी की रामलाल को डर था कि कहीं उसका मोटा फौलादी लौड़ा बहु की कच्छी ना फाड़ दे. कुछ देर कच्छी को लंड पे रगड़ने और बहु की चूत की कल्पना करके रामलाल अपने को कण्ट्रोल न कर सका और उसने ढेर सारा वीर्य कच्छी में उंडेल दिया. फिर उसने कच्छी धोने में डाल दी और वापस अपने कमरे में चला गया.

कहानी जारी रहेगी…

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