प्यासी बहु, ठरकी ससुर और गधे का लंड भाग -2

Sasur bahu chudai kahani hindi:- अगले दिन जब कंचन अपने कपड़े धोने लगी तो उसे अपनी पैंटी पे दाग नज़र आया. ऐसा दाग तो मरद के वीर्य का होता है. कंचन सोच में पड़ गयी की ये दाग उसकी पैंटी में कैसे आया. घर में तो सिर्फ एक ही मरद था और वो थे ससुर जी. कहीं ससुर जी तो नहीं…… लेकिन वो उसकी पैंटी के साथ क्या कर रहे थे? कहीं ये उसका वहम तो नहीं था। लेकिन कंचन को शक होता जा रहा था की ससुर जी उस पर फिदा होते जा रहे हैं. कंचन के बदन को ऐसे देखते थे जैसे आंखों से ही चोद रहे हों. अब तो बात बात पे कंचन की पीठ और चूतड़ों पे हाथ फेरने लगे थे. कभी कंचन की पीठ पे हाथ रख के उसकी ब्रा को फील करते हुए कहते “हमारी बहु रानी बहुत अच्छी है” कभी उसकी पतली कमर में हाथ डाल के कहते “हम बहु के बिना न जाने क्या करेंगे” कभि कंचन के चूतड़ों पे हाथ रख कर कहते “जाओ बहु अब आराम कर लो”. जब से कंचन ने कमला से ससुर जी के कारनामे सुने थे तब से वो भी ससुर जी को एक औरत की नज़र से देखने लगी थी. ससुर जी के विशाल लंड के वर्णन ने तो उसकी नींद ही हराम कर दी थी. कंचन को समझ नहीं आ रहा था की वो क्या करे.

अगर आपने इस कहानी का पहला भाग नहीं पढ़ा है तो यहाँ पढे ==>> प्यासी बहु, ठरकी ससुर और गधे का लंड भाग -1

Sasur bahu chudai kahani hindi

Sasur bahu chudai kahani

ससुर जी तो पिता के समान थे. लेकिन कंचन के बदन को ललचायी नज़रों से देखना, बात बात पे उसके चूतड़ों पे हाथ फेरना, फ़ोन पे चुपके से उसकी बातें सुनना और अक्सर ऐसी बातें करना जो कोई ससुर अपनी बहु के साथ नहीं करता और फिर उसकी पैंटी पे वीर्य का वो दाग इस बात को साफ करता था, की ससुर जी का दिल उसपे आ गया है. कंचन के मन में ये बातें चल रही थी, की एक रोज़ जब कंचन सवेरे जल्दी सो के उठ गयी और उसने खिड़की के बाहर झाँका, तो देखा की ससुर जी आँगन में खुली हवा में कसरत कर रहे हैं. कंचन उत्सुकतावश परदे के पीछे से उन्हें देखने लगी. ससुर जी ने सिर्फ एक लंगोट पहन रखा था. कंचन उनका बदन देख कर हैरान रह गयी. ससुर जी लम्बे चौड़े थे. उनका बदन काला और बिलकुल गठा हुआ था. लेकिन सबसे ज़्यादा हैरान हुई ससुर जी के लंगोट का उभार देख कर. ऐसा लगता था की जो कुछ भी लंगोट के अंदर कैद था, वो ख़ासा बड़ा था. कंचन को कमला की बातें याद आने लगी. उसके बदन में चींटियाँ रेंगने लगी. कंचन को विश्वास होने लगा की ससुर जी का लंड ज़रूर ही काफी बड़ा होगा, क्योंकि उसके पति राकेश का लंड भी 8 इंच का है और देवर रामु का लंड तो 10 इंच का था. बाप का लंड बड़ा होगा, इसिलिये तो बच्चों का भी इतना बड़ा है और अगर साली पहली चुदाई में बेहोश हो गयी थी, तब तो ज़रूर ही बहुत बड़ा होगा. पहली बार कंचन के मन में इच्छा जागी, की काश वो ससुर जी का लंड देख सकती.

कंचन को ससुराल आए एक महीने से ज़्यादा हो चला था. अब वो रोज़ सुबह जल्दी उठ जाती और परदे के पीछे से ससुर जी को कसरत करते देखती. कंचन मन ही मन कल्पना करती की ससुर जी का लंड भी गधे के लंड जैसा ख़ासा लम्बा मोटा और काला होगा. लेकिन क्या देवर रामु के लंड से भी बड़ा होगा? आखिर एक मरद का लंड कितना बड़ा हो सकता है? कंचन का विचार पक्का होता जा रहा था की किसी ना किसी दिन तो वो ससुर जी के लंड के दर्शन ज़रूर करेगी. हालांकि अब कंचन को विश्वास हो गया था, की ससुर जी अपनी जवान बहु पर फ़िदा हो चुके हैं, लेकिन फिर भी वो उनकी परीक्षा लेना चाहती थी. पर्दा तो अब भी करती थी, लेकिन अब वो ससुर जी के सामने जाने से पहले अपनी चुन्नी से सर इस प्रकार से ढकती की उसकी छाती पूरी तरह खुली रहे. ससुरजी के लिए दूध का गिलास टेबल पे रखने के लिए इस तरह से झुकती की ससुर जी को उसके ब्लाउज के अंदर झांकने का पूरा मौका मिल जाए. वो अक्सर चूड़ीदार पहनती थी क्योंकि ससुरजी ने एक दिन उसको कहा था कि बहु चूड़ीदार में तुम बहुत सूंदर लगती हो. सच तुम्हारा ये चूड़ीदार और कुरता तो तुम्हारी जवानी में चार चाँद लगा देता है. ससुर जी के सामने अपने चूतड़ों को कुछ ज़्यादा ही मटका के चलती थी. पर्दा करने का कंचन को बहुत फायदा था, क्योंकि वो तो चुन्नी के अंदर से ससुरजी पे क्या बीत रही है देख सकती थी, लेकिन ससुर जी उसका चेहरा ठीक से नहीं देख पाते थे. Sasur bahu chudai kahani

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एक दिन की बात है, कंचन नहाने जा रही थी लेकिन बाथरूम का बल्ब फ्यूज हो गया था. कंचन सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में ही थी. कंचन ने एक कुर्सी पे चढ़ कर बल्ब बदलने की कोशिश की, लेकिन कुर्सी की टांगें हिल रही थी और कंचन को गिरने का डर था. उसने सास को आवाज़ दी. दो तीन बार पुकारा लेकिन सासु माँ शायद पूजा कर रही थी. उसे कंचन की आवाज़ सुनाई नहीं दी. रामलाल आँगन में अखबार पढ़ रहा था. बहु की आवाज़ सुन कर वो बाथरूम में गया. वहां का नज़ारा देख के तो उसका कलेजा धक् रह गया. बहु सिर्फ पीटिकट और ब्लॉउस में कुर्सी पे खड़ी हुई थी और उसके हाथ में बल्ब था. पेटीकोट नाभि से करीब आठ इंच नीचे बंधा हुआ था. बहु की गोरी कमर और मांसल पेट पूरा नज़र आ रहा था. कंचन ससुर जी को सामने देख कर घबरा गयी और एक हाथ से अपनी छातियों को ढकने की नाकामयाब कोशिश करने लगी.

कंचन हकलाती हुई बोली पिताजी. आप…!

रामलाल – हाँ बेटी तुम सासु माँ को आवाज़ें दे रही थी! वो तो पूजा कर रही है इसलिए मैं ही आ गया. बोलो क्या काम है?

रामलाल कंचन की जवानी को ललचायी नज़रों से देखता हुआ बोला.

कंचन – जी बल्ब फ्यूज हो गया है, लगाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन कुरसी हिल रही है, सासु माँ को बुला रही थी, की अगर वो मुझे पकड़ लें तो मैं बल्ब बदल सकूँ.

कंचन का एक हाथ अब भी अपनी छातिओं को छुपाने की कोशिश कर रहा था.

रामलाल – कोई बात नहीं बहु मैं तुम्हें पकड़ लेता हूँ.

कंचन – जी आप!!

रामलाल- घबराओ नहीं गिराऊंगा नहीं.

ये कहते हुए रामलाल ने कुर्सी के ऊपर खड़ी कंचन की जाँघों को पीछे से अपनी बाहों में जकड़ लिया. कंचन के भारी नितम्ब रामलाल के मुंह से सिर्फ दो इंच ही दूर थे. रामलाल को पेटीकोट में से कंचन की गुलाबी रंग की पैंटी की झलक मिल रही थी. उफ बहू के 80% चूतड़ तो पैंटी के बाहर थे. कंचन के विशाल चूतड़ रामलाल के मुंह के इतने नज़दीक थे की उसका दिल कर रहा था कि उन विशाल चूतड़ों के बीच में मुंह डाल दे. कंचन बुरी तरह से शर्मा गयी, लेकिन क्या करती जल्दी से बल्ब लग़ाने की कोशिश करने लगी. बल्ब लगाने के लिए उसे हाथ छाती पर से हटाना पड़ा. रामलाल के दिल पे तो जैसे छुरी चल गयी. बहू की बड़ी बड़ी चूचियाँ ब्लाउज से बाहर गिरने को हो रही थी. पेटीकोट इतना नीचे बंधा हुआ था की बहु के नितम्ब वहीँ से शुरू हो जाते थे. कुर्सी अब भी हिल रहा थी. रामलाल ने इस सुनहरे मौके का पूरा फायदा उठाया. उसने अपने पैर से कुर्सी को और हिला दिया. बहु गिरने को हुई तो रामलाल ने उसकी जांघों को अपनी और खींच कर उसे अच्छी तरह जकड़ लिया. जाँघों को अपनी और खींचने से कंचन के चूतड़ पीछे की ओर हो गए और रामलाल का मुंह बहु के विशाल चूतड़ों के बीच की दरार में घुस गया. उफ क्या मादक खूशबू थी बहु के बदन की. करीब 10 सेकंड तक रामलाल ने अपना मुंह बहु के चूतड़ों की दरार में दबा के रखा. पेटीकोट पैंटी समेत बहु के चूतड़ों के बीच फँस गया. कंचन ने किसी तरह जल्दी से बल्ब लगाया. Sasur bahu chudai kahani

कंचन- पिताजी बल्ब लग गया.

रामलाल – ठीक है बहु.

ये कहते हुए रामलाल ने एकदम से उसकी टांगें छोड़ दी. जैसे ही रामलाल ने कंचन की टाँगे छोड़ी कंचन का बैलेन्स बिगड़ गया और वो आगे की ओर गिरने लगी. रामलाल ने एकदम पीछे से हाथ डाल कर उसे गिरने से बचा लिया. लेकिन उसका हाथ सीधे कंचन की बड़ी बड़ी चूचिओं पे पड़ा. अब कंचन की दोनों चूचियाँ रामलाल के हाथों में थी. रामलाल ने उसे चूचियों से पकड़ के अपनी ओर खींच लिया. अब सीन ये था की रामलाल पीछे से बहु से चिपका हुआ था. बहु के विशाल चूतड़ रामलाल के सख्त होते हुए लंड से सटे हुए थे और बहु की दोनों चूचियाँ रामलाल के हाथों में दबि हुई थी. ये सब तीन सेकंड में हो गया.

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रामलाल – अरे बहु मैं ना पकड़ता तो तुम तो गिर जाती. ना जाने कितनी चोट लगति. ऐसे काम तुम्हें खुद नहीं करने चाहिए. हमें कह दिया होता. आगे से ऐसा नहीं करना। रामलाल बहु की चूचिओं पर से हाथ हटाता हुआ बोला.

कंचन – जी पिता जी! आगे से ऐसा नहीं करुँगी. रामलाल जल्दी से बाहर चला गया, क्योंकि अब उसका लंड तन गया था और बहु को नज़र आ जाता. लेकिन कंचन भी अनाड़ी नहीं थी. उसे अच्छी तरह पता था की ससुर जी ने मौके का पूरा फायदा उठाया था. उसकी जांघों को जिस तरह से उन्होंने पकड़ा था वैसे एक ससुर अपनी बहु की टांगें नहीं पकड़ता. उसके चूतड़ों के बीच में मुंह देना और फिर से गिरने से बचाने के बहाने दोनों चूचियाँ दबा देना कोई इत्तेफ़ाक़ नहीं था और फिर उसे गिरने से बचाने के बाद उसके चूतड़ों के साथ ऐसे चिपक के खड़े थे की कंचन को उनका लंड अपने चूतरों पर रगरता हुआ महसूस हो रहा था. ससुरजी जल्दी से बाहर तो चले गये लेकिन उनकी धोती का उठाव कंचन से नहीं छुपा था. वो समझ गई की ससुर जी का लंड तना हुआ था. कंचन नहाने के लिए बाथरूम में चली गयी. लेकिन उसके चूतड़ों के बीच ससुर जी के मुंह का स्पर्श और उसकी चूचिओं पे उनके हाथ का स्पर्श उसे अभी तक महसूस हो रहा था. उसकी चूत गीली होने लगी और पहली बार उसने ससुर जी के नाम से अपनी चूत में ऊँगली डाल कर अपनी वासना की भूख को शांत करने की कोशिश की.

अब तो कंचन ने भी ससुर जी को रिझाने का प्लान बनाना शुरू कर दिया. एक बार फिर सासु माँ को ससुर जी के साथ शहर जाना था. इस बार राम लाल ने पहले ही किसी को गाडी के लिए बोल दिया था. उसने इस बार भी माया देवी को किसी के साथ गाडी में शहर भेज दिया. माया देवी के जाने के बाद वो कंचन से बोला की वो खेतों में जा रहा है और शाम तक आएगा. रामलाल के जाने के बाद कंचन ने घर का दरवाज़ा अंदर से बन्द कर लिया और कपड़े धोने और नहाने की तैयारी करने लगी. उधर रामलाल थोड़ी दूर जा के वापस आ गया. उसका इरादा फिर पहले की तरह अपने कमरे में साइड के दरवाज़े से घुस कर बहु को देखने का था. वो सोच रहा था की अगर किस्मत ने साथ दिया तो बहु को नंगी देख पायेगा. कंचन किसी काम से छत पे गयी. अचानक जब उसने नीचे झाँका तो उसकी नज़र चुपके से अपने कमरे का ताला खोलते हुए रामलाल पे पड़ गयी. कंचन समझ गयी की रामलाल चुपचाप अपने कमरे में क्यों घुस रहा है. अब तो कंचन ने सोच लिया की आज वो जी भर के ससुर जी को तड़पाएगी. मर्दों को तड़पाने में तो वो बचपन से माहिर थी. वो नीचे आ कर अपने कमरे में गयी लेकिन कमरे का दरवाज़ा खुला छोड़ दिया. उधर रामलाल अपने कमरे में से बहु के कमरे में झाँक रहा था.

कंचन शीशे के सामने खड़ी होकर अपनी साड़ी उतारने लगी. उसकी पीठ रामलाल की ओर थी. रामलाल सोच रहा था की बहु कितनी अदा के साथ साड़ी उतार रही है, जैसे कोई मरद सामने बैठा हो और उसे रिझाने के लिए साड़ी उतार रही हो. उसे क्या पता था की बहु उसी को रिझाने के लिए इतने नखरों के साथ साड़ी उतार रही थी. धीरे धीरे बहु ने साड़ी उतार दी. अब वो सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में ही थी. कंचन पेटीकोट और ब्लाउज़ में ही आँगन में आ गयी. उसे मालूम था की ससुर जी की नज़रें उसपर लगी हुई हैं. सफ़ेद पेटीकोट के महीन कपड़े में से बहु की काले रंग की कच्छी साफ़ नज़र आ रही थी. ख़ास कर जब बहु चलती तो बारी बारी से उसके मटकते हुए चूतड़ों पे पेटीकोट तिरछा हो जाता और कच्छी की झलक भी और ज़्यादा साफ़ हो जाती. रामलाल का लौडा हरकत करने लगा था. बहु आँगन में बैठके कपड़े धोने लगी. पानी से उसका ब्लाउज गीला हो गया था और रामलाल को अंदर से झाँकती हुए ब्रा भी नज़र आ रही थी. थोड़ी देर बाद बहु अपने कमरे में गयी और फिर शीशे के सामने खड़े हो के अपनी जवानी को निहारने लगी. अचानक बहु ने अपना ब्लाउज उतार दिया. वो अब भी शीशे के सामने खड़ी थी और उसकी पीठ रामलाल की ओर थी. फिर धीरे से बहु का हाथ पेटीकोट के नाड़े पे गया. रामलाल का तो कलेजा ही मुंह को आ गया. वो मन ही मन प्रार्थना करने लगा कि हे भगवान् बहु पेटीकोट भी उतार दे. भगवान् ने मानो उसकी सुन ली. Sasur bahu chudai kahani

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बहु ने पेटीकोट का नाड़ा खींच दिया और अगले ही पल पेटीकोट बहु के पैरों में पड़ा हुआ था. अब बहु सिर्फ कच्छी और ब्रा में खड़ी अपने आप को शीशे में निहार रही थी. क्या तराशा हुआ बदन था. भगवान् ने बहु को बड़ी फुरसत से बनाया था. बहु की ब्रा बड़ी मुश्किल से उसकी चूचिओं को संभाले हुए थी और छोटी सी काली कच्छी बहु के उन विशाल चूतड़ों को संभालने में बिलकुल भी कामयाब नहीं थी. 80% चूतड़ कच्छी के बाहर थे. शीशे में अपने को निहारते हुए बहु ने दोनों हाथ सिर के ऊपर उठा दिए और बाहों के नीचे बगलों में उगे हुए बालों का निरीक्षण करने लगी. बाल बहुत ही घने और काले थे. रामलाल सोच रहा था की शायद बहु को बगलों में से बाल साफ़ करने का टाइम नही मिला था वार्ना शहर की लड़किआं तो बगलों के बाल साफ़ करती हैं. अगर बगलों में इतने घने बाल थे तो चूत पे कितने घने बाल होंगे. इतने में बहु ने झाड़ू उठा ली और कमरे में झाड़ू लगाने लगी. उसकी पीठ अब भी रामलाल की ओर थी. कंचन अच्छी तरह जानती थी, इस वक़्त रामलाल पे क्या बीत रही होगी. झाड़ू लगाने के बहाने वो आगे को झुकी और अपने विशाल चूतड़ों को बहुत ही मादक तरीके से पीछे की ओर उठा दिया. कंचन जानती थी की उसके चूतड़ मर्दों पे किस तरह से कहर ढाते हैं.

राम लाल का कलेजा मुंह में आ गया. उसकी आखें तो मानो बाहर गिरने को हो रही थी. जिस तरह से कँचन आगे झुकी हुई थी और उसके चूतड़ पीछे की और उठे हुए होने के कारण दोनों चूतड़ ऐसे फैल गए थे की उनके बीच में कम से कम तीन इंच का फासला हो गया था. ऐसा लग रहा था जैसे दोनों चूतड़ बहु की छोटी सी कच्छी को निगलने के लिए तैयार हों. रामलाल को कोई शक नहीं था की जैसे ही बहु सीधी होगी उसके विशाल चूतड़ उस बेचारी छोटी सी कच्छी को निगल जाएंगे. कंचन भी जानती थी की जब वो सीधी होगी तो उसकी पैंटी का क्या हाल होगा. वहीं हुआ, बहु झाड़ू लगाते लगाते सीधी हुई और उसके विशाल चूतड़ों ने भूखे शेरों की तरह उसकी कच्छी को दबोच लिया. अब कच्छी उसके दोनों चूतड़ों के बीच में फँसी हुई थी. रामलाल का लंड फनफनाने लगा. कंचन ये झाड़ू लगाने का खेल थोड़ी देर तक खेलती रही, बार बार सीधी हो जाती. धीरे धीरे उसकी पैंटी चूतड़ों पे से सिमट के उनके बीच की दरार में फँस गयी. कंचन जानती थी की इस वक़्त ससुर जी पे क्या बीत रही होगी. लेकिन अभी तो खेल शुरू ही हुआ था. Sasur bahu chudai kahani

कंचन फिर से शीशे के सामने खड़ी हो गयी. शीशे में अपने खूबसूरत बदन को निहारते हुए बड़ी अदा के साथ उसने चूतड़ों के बीच फँसी पैंटी को निकाल के ठीक से एडजस्ट किया, फिर उसने धुला हुआ पेटीकोट और ब्लाउज निकाला. अब कंचन शीशे के सामने खड़ी हो गयी और अपनी ब्रा उतार दी. उसकी पीठ रामलाल की और थी. ब्रा उतरने के बाद उसने बड़ी अदा के साथ अपनी पैंटी भी उतार दी. अब वो शीशे के सामने बिलकुल नंगी खड़ी थी. रामलाल के तो पसीने ही छूट गए. बहु को इस तरह नंगी देख कर उसके मुंह में पानी आ रहा था. क्या जान लेवा बदन था बहु का. रामलाल मन ही मन सोच रहा था की बहु घूम जाए तो उसकी चूचिओं और चूत के भी दर्शन हो जाएं. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. अब बहु अचानक आगे की ओर झुकी मानो ज़मीन पे पड़ी हुई किसी चीज़ को उठाने की कोशिश कर रही हो. ऐसा करने से उसके चूतड़ पीछे की ओर उठ गए और बहु की गोरी गोरी जाँघों और चूतड़ों के बीच से झाँटों के काले काले बाल झाँकने लगे. कंचन फिर से सीधी हुई और रामलाल की ओर पीठ रखते हुए ही ब्लाउज पहना और फिर पेटीकोट पहन लिया. रामलाल जानता था की बहु ने ब्लाउज की नीचे ब्रा और पेटीकोट के नीचे कच्छी नहीं पहनी है. अब कंचन उतारे हुए कपड़े ले कर आँगन में धोने आ गयी.

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बिना कच्छी के बहु के चूतड़ चलते वक़्त ज़्यादा हिल रहे थे. कपड़े धोते हुए उसका ब्लाउज गीला हो गया.अंदर ब्रा न पहना होने के कारण रामलाल को बहु की बड़ी बड़ी चूचि और निप्पल्स साफ़ नज़र आ रहे थे. बहु पैर मोड के बैठी थी. पेटीकोट उसकी मुड़ी हुई टांगों के बीच में फंसा हुआ था. रामलाल सोच रहा था की किसी तरह पेटीकोट का निचला हिस्सा बहु की टांगों से निकल जाए. रामलाल को बहुत इंतज़ार नहीं करना पड़ा. कंचन का भी वही इरादा था. इस कला में तो वो बहुत माहिर थी. एक बार पहले भी अपने देवर के साथ ऐसा ही कुछ कर चुकी थी. कपड़े धोते धोते उसने पेटीकोट का निचला हिस्सा अपनी मुड़ी हुई टांगों से छूट के गिरने दिया. कंचन उसी प्रकार कपड़े धोने बैठी हुई थी जैसे औरतेँ पेशाब करने बैठती हैं. कंचन को मालूम था की अब उसकी नंगी चूत पूरी तरह फैली हुई थी. क्योंकि कमला उसकी चूत के छेद के आस पास के बाल काट दिए थे, इसलिए अब तो उसकी फूली हुई चूत की दोनों फांकें उनके बीच का कटाव और कटाव के बीच में से चूत के बड़े बड़े होंठ साफ़ नज़र आ रहे थे. रामलाल को तो मानो लकवा मार गया. उसे डर था की कहीं उसके दिल की धड़कन रुक न जाए. लेकिन अगले ही पल कंचन ने पेटीकोट फिर से ठीक कर लिया. रामलाल को उसकी चूत के दर्शन मुश्किल से तीन सेकंड के लिये ही हुए. गोरी गोरी मांसल जाँघों के बीच में घना जंगल और उस जंगल में से झांकती फूली हुई वो चूत! क्या गज़ब का नज़ारा था.

बहु की चूत के होंठ ऐसे खुले हुए थे मानो बरसों से प्यासे हो. उफ क्या लम्बी घनी झांटें थी बहु की. कपड़े धोने का नाटक करते हुए कंचन ने ब्लाउज और पेटीकोट खूब गीला कर लिया था. भीगे हुए ब्लाउज और पेटीकोट कंचन के बदन से चिपका जा रहा था . कंचन काफी देर तक ससुरजी को इसी तरह तड़पाती रही.

इस घटना के बाद न जाने रामलाल ने बहु की चूत की याद में कितनी बार मुठ मारी. सिर्फ एक बार बहु की चूत लेने के लिए तो वो जान भी देने को तैयार था. लेकिन क्या करता बेचारा, रिश्ता ही कुछ ऐसा था. रामलाल की दीवानगी बढ़ती जा रही थी. कंचन रामलाल के दिल की हालत अच्छी तरह जानती थी. आखिर मर्दों को तड़पाने का खेल तो वो बचपन से खेल रही थी. एक रात की बात है. सासु माँ अपने कमरे में सो रही थी और रामलाल भी अपने कमरे में लाइट बन्द करके सोने की कोशिश कर रहा था. इतने में उसे कुछ आवाज़ आई. कमरे से बाहर झाँका तो देखा की बहु बाथरूम की ओर जा रही थी. बहु ने नाइटी पहन रखी थी और नाइटी के बारीक कपड़े में से उसकी मांसल टांगों की झलक मिल रही थी. रामलाल समझ गया की बहु पेशाब करने जा रही है. बहु की चूत से निकलते पेशाब के मादक संगीत की कल्पना से ही रामलाल का लंड खड़ा होने लगा. कंचन बाथरूम में गयी लेकिन सबको सोया समझ कर उसने बाथरूम का दरवाज़ा अंदर से बन्द नहीं किया. Sasur bahu chudai kahani

थोड़ी देर में पिससससससस……..’ का मधुर संगीत रामलाल के कानो में पड़ने लगा. अचानक ज़ोर से बहु के चिल्लाने की आवाज़ आई. आअअअअ अअअअअअअ आआआआईईई …… रामलाल घबरा के बाथरूम में भागा. उसने देखा कि बहु बुरी तरह घबराई हुई थी. उसके चेहरे पे हवाइयाँ उड़ रही थी. बहुत ही अच्छा मौका था. रामलाल ने मोके का भरपूर फायदा उठाते हुए बहु को खींच के सीने से लगा लिया. कंचन तो बुरी तरह घबराई हुई थी. वो भी रामलाल के बदन से चिपक गयी. रामलाल कंचन की पीठ सहलाता हुआ बोला..

रामलाल – क्या हुआ बहु?

कंचन – ज्ज्ज्जी स्स्सासाँप. सांप! कंचन नाली की और इशारा करते हुए बोली.

रामलाल – वहां तो कुछ नहीं है. रामलाल बहु की पीठ सहलाता हुआ बोला.

बहु ने ब्रा नहीं पहना हुआ था.

कंचन – नहीं पिता जी नाली में से काले रंग का एक लम्बा मोटा सांप निकला था, शायद नाग था.

रामलाल – कैसे निकला बहु? तुम क्या कर रही थी?

रामलाल का हाथ बहु की पीठ से फिसल कर उसके मोटे मोटे चूतड़ों पे आ गया.

कंचन – हम वहां नाली पे बैठके पेशाब कर रहे थे की अचानक वो मोटा काला नाग निकल आया! हाय राम कितना डरावना था! हमारी तो जान ही निकल गयी.

बहु को दिलासा देने के बहाने रामलाल उसके विशाल चूतड़ों को सहलाने लगा. अचानक उसे एहसास हुआ की बहु ने कच्छी भी नहीं पहनी हुई थी. नाइटी के अंदर से बहु की नंगी जवानी रामलाल के बदन को गरमा रही थी.

रामलाल – अरे बहु तुमने आज अंदर ब्रा और कच्छी नहीं पहनी है?

कंचन को भी अचानक एहसास हुआ की वो ससुर जी से चिपकी हुई है। और ससुर जी काफी देर से उसकी पीठ और चूतड़ों को सहला रहे हैं. वो शरमाती हुई बोली..

कंचन- जी सारा दिन बदन कसा रहता है ना इसलिए रात को सोने से पहले हम ब्रा और कच्छी को उतार के सोते हैं.

रामलाल – तुम ठीक करती हो बहु! सारा दिन तो तुम्हारी जवानी ब्रा और कच्ची में कसी रहती है. रात में तो उसे आज़ादी चाहिए.

नाली के पास ही एक बाल्टी में बहु की ब्रा और कच्छी धोने के लिए पड़ी हुई थी. रामलाल उनकी और इशारा करते हुए बोला…

रामलाल – वही हैं न तुम्हारे कपड़े.?

कंचन – जी. हो…

रामलाल – अब समझा ये नाग यहां क्यों आया था! रामलाल बहु की कच्ची उठाता हुआ बोला.

कंचन- क्यों आया था पिताजी?

कंचन रामलाल के हाथ में अपनी उतारी हुई पैंटी देख के बुरी तरह शर्मा गयी. रामलाल बहु के सामने ही उसकी पैंटी को सूँघता हुआ बोला.

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रामलाल – अरे बहु इस कच्छी में से तुम्हारे बदन की खुशबू आ रही है. उस काले नाग को तुम्हारे बदन की ये खुशबू पसंद आ गयी होगी. जब तुम पेशाब करने के लिए पैर फैला के बैठी तो वही खूशबू नाग को फिर से आई. इसीलिए वो एकदम से बाहर निकल आया. रामलाल बहु के मादक चूतड़ों को सहलाता हुआ बोला. Sasur bahu chudai kahani

कंचन- ठीक है पिताजी आगे से हम अपने कपड़े बाथरूम में नहीं रखेंगे.

रामलाल – हाँ बहु ये तो शुक्र करो नाग ने तुम्हें टांगों के बीच में नहीं काट लिया नहीं तो बेचारे राकेश का क्या होता? रामलाल बहु के चूतड़ दबाता हुआ बोला.

कंचन -हाय…! पिताजी आप तो बहुत खराब हैं! हम ऐसे ही थोड़े ही काटने देते.

रामलाल – तो फिर कैसे काटने देती बहु?

रामलाल को कच्छी में चिपके हुए बहु की झांटों के दो बाल नज़र आ गए.

रामलाल – ये बाल तुम्हारे हैं बहु.?

कंचन का चेहरा सुर्ख लाल हो गया, वो हकलाती हुई बोली..

कंचन- ज्ज्ज्जी…

रामलाल – बहुत लम्बे हैं, हम तो तुम्हारे सर के बाल देख कर ही समझ गये थे की बाकि जगह के बाल भी खूब लम्बे होंगे.

अब तो कंचन का रामलाल से आँख मिला पाना मुश्किल हो रहा था. ससुर जी की बाहों से अपने आप को छुड़ा के बोली..

कंचन- जी हमें बहुत नींद आ रही है अब हम सोने जा रहे हैं.

कंचन जल्दी से अपने कमरे में भाग गयी। वो सोच रही थी कि आज दूसरी बार ससुर जी ने मौके का पूरा फायदा उठाया और वो कुछ न कर सकी. उधर रामलाल अपने बिस्तर पे करवट बदल रहा था. वो बहु के सोने का इंतज़ार कर रहा था ताकि बाथरूम में जा के उसकी कच्छी को सूँघ के उसकी मादक चूत की महक ले सके. जैसे ही कंचन के कमरे की लाइट बन्द हुई रामलाल बाथरूम की और चल पड़ा. बाथरूम में घुस कर बहु की कच्छी को सूँघते सूँघते उसका लंड बुरी तरह खड़ा हो गया. रामलाल बहु की नाज़ुक कच्छी को अपने लंड के सुपाड़े पे रख के रगड़ने लगा. काफी देर तक रगड़ने के बाद वो झड़ गया और उसके लंड ने ढेर सारा वीर्य बहु की कच्छी में उंडेल दिया. रामलाल कच्ची को वहीं धोने के कपड़ों में डाल कर वापस अपने कमरे में आ कर सो गया. अगले दिन जब कंचन ने धोने के लिए अपनी पैंटी उठाई तो वीर्य के दाग लगे हुए देख कर समझ गयी की ससुर जी ने रात को अपना लंड उसकी पैंटी पे रगड़ा है. अब तो कंचन के मन में ससुर जी के इरादों के बारे में कोई शक नहीं रह गया था. लेकिन वो जानती थी की शायद ससुर जी पहल नहीं करेंगे. उन्हें बढ़ावा देना पड़ेगा. अब तो वो भी ससुर जी के लंड के दर्शन करने के लिए तड़प रही थी.

ससुर बहू चुदाई की कहानी

जब से रामलाल को पता लगा था की बहु रात को सोते वक़्त ब्रा और पैंटी उतार के सोती है तब से वो इस चक्कर में रहता था की किसी तरह बहु के नंगे बदन के दर्शन हो जाएं. इसी चक्कर में रामलाल एक दिन सवेरे जल्दी उठ कर बहु को चाय देने के बहाने उसके कमरे में घुस गया. कंचन बेखबर घोड़े बेच कर सो रही थी. वो पेट के बल पड़ी हुई थी और उसकी नाइटी जाँघों तक उठी हुई थी. बहु की गोरि गोरी मोटी मांसल जांघें देख के रामलाल का लंड फनफनाने लगा. उसका दिल कर रहा था की नाइटी को ऊपर खींच के बहु के विशाल मादक चूतड़ों के दर्शन कर ले, लेकिन इतनी हिम्मत नहीं जुटा पाया. रामलाल ने चाय टेबल पे रखी और फिर बहु के विशाल चूतड़ों को हिलाते हुए बोला.. Sasur bahu chudai kahani

रामलाल – बहु उठो चाय पी लो.

कंचन हड्बड़ा के उठी. गहरी नींद से इस तरह हड्बड़ा के उठ कर बैठते हुए कंचन की नाइटी बिलकुल ही ऊपर तक सरक गयी और इससे पहले की वो अपनी नाइटी ठीक करे, कुछ सेकंड के लिए रामलाल को कंचन की गोरी गोरी मांसल जाँघों के बीच में से घने बालों से ढकी हुई चूत की एक झलक मिल गयी.

कंचन- अरे पिताजी आप?

रामलाल – हाँ बहु हमने सोचा रोज़ बहु हमें चाय पिलाती है तो आज क्यों ना हम बहु को चाय पिलाएं.

कंचन- पिताजी आपने क्यों तकलीफ की? हम उठ के चाय बना लेते.

मन ही मन कंचन जानती थी ससुर जी ने इतनी तकलीफ क्यों की. पता नहीं सासुर जी कितनी देर से उसकी जवानी का अपनी आँखों से रसपान कर रहे थे.

रामलाल – अरे इसमें तकलीफ की क्या बात है? तुम चाय पी लो.

ये कह कर रामलाल चला गया. कंचन ने नोटिस किया की ससुर जी का लंड खड़ा हुआ था जिसको छुपाते हुए वो बाहर चले गए. कंचन के दिमाग में एक प्लान आया. वो देखना चाहती थी की अगर ससुर जी को इस तरह का मौका मिल जाए तो वो किस हद तक जा सकते हैं. उस रात कंचन ने सिरदर्द का बहाना किया और ससुर जी से सर दर्द की दवा मांगी.

कंचन- पिता जी हमारे सर में बहुत दर्द हो रहा है! सर दर्द और नींद की गोली भी दे दीजिये.

रामलाल – हाँ बहु सर दर्द के साथ तुम दो नींद की दो गोली ले लो ताकि रात में डिस्टर्ब न हो.

कंचन समझ गयी की ससुर जी नींद की दो गोलि खाने के लिए क्यों कह रहे हैं. उसका प्लान सफल होता नज़र आ रहता. उसे पूरा विश्वास था की आज रात ससुर जी उसके कमरे में ज़रूर आएँगे. रात को सोने से पहले ससुर जी ने अपने हाथों से कँचन को सर दर्द और नींद की दो गोलियां दी. कंचन गोलियां ले करअपने कमरे में आयी और गोलियों को तो बाथरूम में फ़ेंक दिया. ससुर जी को यह दिखाने के लिए की वो सर दर्द से बहुत परेशान और थकी हुई है कंचन ने साड़ी उतार के पास पड़ी कुर्सी पे फ़ेंक दी. फिर उसने अपनी पैंटी और ब्रा उतारी और बिस्तर के पास ज़मीन पर फेंक दी. ब्लाउज के सामने वाले तीन हुक्स में से दो हुक खोल दिए. अब तो उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ ब्लाउज में सिर्फ एक ही हुक के कारण कैद थी. कंचन का आज नाइटी के बजाये ब्लाउज और पेटीकोट में ही सोने का इरादा था ताकि ससुर जी को ऐसा लगे की सर दर्द और नींद के कारण उसने नाइटी भी नहीं पहनी. आज तो उसने अपने बरामदे की लाइट भी ऑफ नहीं की ताकि थोड़ी रौशनी अंदर आती रहे और ससुर जी उसकी जवानी को देख सकें.

ससुर ने बहू को पेल दिया

पूरी तैयारी करके कंचन ने अपने बाल भी खोल लिए और बिस्तर पे बहुत मादक ढंग से लेट गयी. वो पेट के बल लेटी हुई थी और उसने पेटीकोट इतना ऊपर चढ़ा लिया की अब वो उसके चूतड़ों से दो इंच ही नीचे था. कंचन की गोरी गोरी मांसल जांघें और टांगें पूरी तरह से नंगी थी. ससुर जी के स्वागत की पूरी तैयारी हो चुकी थी. रात भी काफी हो चुकी थी और कंचन बड़ी बेसब्री से ससुर जी के आने का इंतज़ार कर रही थी. वो सोच रही थी की ससुर जी उसको गहरी नींद में समझ कर क्या क्या करेंगे. रात को करीब एक बजे के आस पास कंचन को अपने कमरे का दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आई. उसकी साँसें तेज़ हो गयी. थोड़ा थोड़ा डर भी लग रहा था. ससुर जी दबे पाँव कमरे में घुसे और सामने का नज़ारा देख के उनका दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा. बहु इतनी थकी हुई और नींद में थी की उसने नाइटी तक नहीं पहनी. पेट के बल पड़ी हुई बहु के चूतड़ों का उभार बहुत ही जान लेवा था. बाहर से आती हुई भीनी भीनी रौशनी में जाँघों तक उठा हुआ पेटीकोट, बहू की नंगी टांगों को बहुत ही मादक बना रहा था. बहु ऐसे टाँगे फैला के पड़ी हुई थी की थोड़ा सा पेटीकोट और ऊपर सरक जाता तो बहु की लाजवाब चूत के दर्शन हो जाते, जिसकी झलक रामलाल पहले भी देख चुका था. Sasur bahu chudai kahani

आज मौका था, जी भर के बहु की चूत के दर्शन करने का. रामलाल मन ही मन सोच रहा था की कहीं बहु कच्छी पहनके न सो गयी हो. तभी उसकी नज़र बिस्टेर के पास ज़मीन पे पारी हुई कच्छी और ब्रा पे पर गयी. रामलाल का लंड बुरी तरह से खड़ा हो गया था. रामलाल सोच रहा था की बेचारी बहु इतनी नींद में थी की कच्ची और ब्रा भी ज़मीन पे ही फ़ेंक दी. अब तो उसे यकीन था कि बहु पेटीकोट और ब्लाउज के नीचे बिलकुल नंगी थी. सारा दिन ब्रा और कच्ची में कसी हुई जवानी को बहु ने रात को आज़ाद कर दिया था. आज रात रामलाल बहु की आज़ाद जवानी के दर्शन करने का इरादा करके आया था. फिर भी वो यकीन करना चाहता था की बहु गहरी नींद में सो रही है. उसने कंचन को धीरे से पुकारा..

आगे क्या होगा बताएँगे अगले भाग मे..

कहानी जारी रहेगी …

5 thoughts on “प्यासी बहु, ठरकी ससुर और गधे का लंड भाग -2”

  1. Bhosdichod bhuchod betichod sasur se ek bar chuda lane ke baad pati ka lund bhenchod hijda jaisa lagta h

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