सासु माँ की प्यासी चूत को ठंडा किया

Sasu maa sex story:- हेलो दोस्तों ! कहानी का पूरा मजा लेने के लिए इसे पूरा पढियेगा। मैं बाथरूम में नहाने के लिए जैसे ही घुसा तो मैंने देखा कि मैं तौलिया लाना तो भूल ही गया था। मैंने सोचा कि चलो पहले तौलिया लेकर आया जाए। फिर अचानक से मेरे दिमाग में एक शरारत सूझी। मैंने अपने पूरे बदन पर ढ़ेर सारा साबुन लगा लिया और फिर मैंने थोड़ा सा दरवाजा खोल कर अपनी पत्नी प्रिया को आवाज लगानी शुरू कर दी।

प्रिया, प्रिया, सुनो कहां पर हो । प्रिया, मैं काफी देर से आवाज लगाए जा रहा था, लेकिन प्रिया ने मेरी किसी भी बात का जवाब नहीं दिया। मैंने फिर से आवाज लगाते हुए कहा, प्रिया, देखो मैं तौलिया लाना भूल गया हूं, मुझे तौलिया दे दो। मेरे दो चार बार आवाज लगाने के बाद मुझे प्रिया की पायल की आवाज आने लगी।

Sasu maa sex story hindi

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फिर थोड़ी ही देर में मेरी तरफ प्रिया ने तौलिया बढ़ा दिया। मैंने प्रिया के हाथ से तौलिया लेकर शरारत के अंदाज में प्रिया का हाथ पकड़ लिया और उसे अंदर बाथरूम में खींचने लगा, लेकिन तभी बाहर से मुझे आवाजा आयी, दामादजी प्रिया नहीं, यह तो मै हूँ तुम्हारी सासू मां. अपनी सासू मां की आवाज सुनकर मैं हक्का बक्का रह गया और मैंने जल्दी से उनका हाथ छोड़ दिया और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया।

मैं बाथरूम के अंदर खड़ा खड़ा यही सोच रहा था कि पता नहीं सासू मां मेरे बारे में क्या सोच रही होंगी। मैं जैसे ही नहाकर बाथरूम से बाहर निकला तभी प्रिया सामने खड़ी हुई थी, और मुझसे पूछने लगी क्या है क्यों इतनी जोर जोर से चिल्ला रहे थे? प्रिया प्रिया प्रिया क्या परेशानी आ गई थी? मैं छत पर थी.

मैं कुछ बोलता, इससे पहले ही मेरी सासू मां बोल पड़ी। प्रिया बेटी, दामाद जी को तौलिया चाहिए था, इसीलिए वो तुम्हें आवाज लगा रहे थे। तुम यहां पर थी नहीं। इसलिए मैंने तौलिया दामाद जी को दे दिया और उन्होंने मुझे प्रिया समझकर, और मेरी…….

सासू मां इतना बोलते ही चुप हो गई और मुस्कुराने लगी. तभी प्रिया ने कहा, क्या किया इन्होने आपके साथ? मैंने हड़बड़ाते हुए कहा, अरे नहीं नहीं प्रिया, कुछ भी नहीं। मुझे लगा कि तुम हो, इसलिए बस मैं थोड़ा सा गुस्सा हो गया था और फिर मैं जल्दी से अपनी नजरें नीची करता हुआ अपने कमरे में जाकर तैयार हो गया और आज मैं बिना खाना खाए ही ऑफिस के लिए निकल पड़ा। Sasu maa sex story

Sasu maa ko choda sex story

आज सारा दिन ऑफिस में मुझे इसी बात का अफसोस हो रहा था कि मैंने इतनी बड़ी गलती कैसे कर दी। मुझे पहले देख लेना चाहिए था कि बाहर प्रिया है या कोई और। शाम को जब मैं घर गया तो मेरा सिर दर्द से फट रहा था। मैं सोफे पर जाकर बैठ गया और मैंने एक बार फिर से प्रिया को आवाज लगाई। प्रिया कहां हो जल्दी आओ देखो मेरे सर में बहुत तेज दर्द हो रहा है। मेरे सर में थोड़ा सा बाम तो लगा देना मैं अपनी आँखें बंद किए सोफे पर ऐसे ही लेटा रहा कि थोड़ी ही देर में प्रिया ने मेरे माथे पर बाम लगाना शुरू कर दिया। प्रिया के हाथों से बाम लगाते हुए मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। फिर मैं प्रिया को पूरे दिन की बात बतानी शुरू कर दी और मैंने प्रिया से कहा… प्रिया तुम्हारे हाथों में तो जादू है मेरे सर का दर्द तुम्हारे हाथों से बाम लगाने से बिल्कुल गायब हो जाता है।

ये कहते कहते मैंने प्रिया के दोनों हाथ पकड़ कर अपने हाथों में ले लिए और जैसे ही मैं प्रिया के हाथों को चूमने वाला था। तभी मेरी सासू मां फिर से बोल पड़ती है। अरे दामाद जी आप ये क्या कर रहे हैं ये तो मैं हूं। प्रिया थोड़ा सामान लेने के लिए बाजार गई है और आप के सर में दर्द हो रहा था। इसलिए मैंने सोचा कि चलो मैं ही थोड़ा बाम लगा देती हूं।

अपनी सासू मां का चेहरा देखकर मेरे सर में जितना दर्द था उससे ज्यादा दर्द हो गया। मैं चुपचाप से वहां से उठकर जाने लगा। तभी, सासू मां ने पीछे से पूछा, क्या हुआ दामाद जी? क्या आपको मेरे से बाम लगवाना अच्छा नहीं लगा? मैं बिना कुछ बोले, चुपचाप अपने कमरे में चला गया।

मै आपको बता दूँ, कि सासू मां मेरी पत्नी की सगी मां नहीं है। मेरी पत्नी की मां का देहांत लगभग 15 साल पहले ही हो गया था। फिर मेरे ससुर जी ने सासू मां के साथ दूसरी शादी कर ली और उनकी शादी के लगभग पांच साल के बाद मेरे ससुर जी का भी देहांत हो गया। फिर मेरी पत्नी और मेरी नई सासू मां ही पूरे घर में अकेले रह गए थे।

इसलिए प्रिया से मेरी शादी के बाद हम लोगों ने अपनी सासू मां को अपने साथ ही रख लिया। लेकिन कुछ दिनों से ना जाने सासू मां बहुत ही अजीब बर्ताव कर रही हैं। मुझे उनका यह बर्ताव अच्छा नहीं लग रहा। कभी कभी तो मेरा मन करता कि मैं प्रिया को सब कुछ बता दूं, लेकिन फिर मैं कुछ सोचकर रुक जाता, लेकिन मैं जितना चुप रहता सासू मां उतना ही मेरे करीब आने की कोशिश करती। अब तो मैंने उनके डर की वजह से प्रिया को आवाज लगाना भी छोड़ दिया कि कहीं मैं आवाज प्रिया को लगाऊं और सासू मां आ जाए। मैंने अपने ज्यादातर काम अपने आप ही करना शुरू कर दिया, लेकिन सासू मां के डर की वजह से प्रिया और मेरे रिश्ते में थोड़ी सी दूरियां आनी शुरू हो गई थी।

लेकिन मैं क्या करता? सासू मां कभी भी हम दोनों के बीच में आ जाया करती थी। एक दिन मुझे प्रिया पर बहुत ज्यादा प्यार आ रहा था। इसलिए मैंने प्रिया को ऑफिस से ही फोन करके तैयार होने के लिए कह दिया कि आज हम लोग बाहर खाना खाएंगे और फिर अपने सुहागरात के दिनों को याद करके एक दूसरे में खो जाएंगे।

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लेकिन जब मैं घर आया तो प्रिया बिल्कुल तैयार थी, लेकिन मेरे घर में आते ही प्रिया ने कहा, हम लोग बाहर खाना खाने के लिए नहीं जा सकते क्योंकि मां की थोड़ी तबीयत ठीक नहीं है। अगर हमने उनको छोड़ दिया तो क्या पता हमारे पीछे उनकी तबियत और खराब हो जाए। प्रिया के मुंह से बातें सुनने के बाद मुझे बहुत बुरा लगा।

मुझे थोड़ा सा अपनी सासू मां के ऊपर भी गुस्सा आ रहा था क्योंकि मुझे ऐसा लगा कि हो सकता है वो यह सब कुछ जान बूझकर कर रही हो. लेकिन प्रिया को देखकर मैंने कहा, कोई बात नहीं प्रिया, तुम घर पर ही खाना बना लो। हम लोग घर पर ही खाना खा लेंगे। फिर मैं थोड़ा सा रोमेंटिक होकर प्रिया के करीब गया और मैंने कहा चलो कोई बात नहीं खाना तो हम घर पर खाएंगे लेकिन मेरी दूसरी वाली बात तो याद है ना? आज तो मैं बस तुम्हारी बांहों में खो जाना चाहता हूं।

प्रिया भी मेरी बात सुनकर शरमा गई और कहने लगी, हां ठीक है, मैं तुम्हारी दूसरी शर्त पूरी करने के लिए तैयार हूं। तुम फ्रेश होकर तैयार हो जाओ। तब तक मै खाना लगाती हूं। मैं, प्रिया और सासू मां ने मिल कर एक साथ खाना खाया और फिर हम लोग अपने अपने कमरे में चले गए। जब मैं अपने कमरे में गया तो मैंने देखा कि प्रिया वहां पर थी ही नहीं।

मैंने प्रिया को बाथरूम में भी देखा। प्रिया बाथरूम में भी नहीं थी। मैंने बाहर जाकर देखा वहां पर भी नहीं थी। फिर मुझे लगा हो सकता है कि प्रिया कुछ ज्यादा ही रोमेंटिक हो गई हो और छत पर चली गई हो। मैंने छत पर जाकर देखा तो प्रिया खड़ी हुई बस चाँद को निहारे जा रही थी। मुझे प्रिया का चेहरा तो दिखाई नहीं दे रहा था, लेकिन पीछे से वो नजारा देखकर मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।

मैंने भी चुपके से जाकर प्रिया को पीछे से गले लगा लिया और कहा प्रिया तुम कितनी सुंदर लग रही हो और तुम चांद को क्यों देख रही हो। तुम चाँद से कुछ कम थोड़ी ना हो। मेरे इतना बोलते ही फिर से जब प्रिया पलटी तो मैंने देखा कि वो प्रिया नहीं वो तो मेरी सासु मां थी। मैंने गुस्से में आकर सासू मां से कहा, आपको परेशानी क्या है?

जहां पर भी मैं प्रिया को देखना चाहता हूं। हर उस जगह पर आप क्यों आ जाती है? आप मुझे और प्रिया को अकेले छोड़ेगी या नहीं। मेरी बात सुनकर सासू मां एकदम से वहीं खड़ी रह गई और उन्होंने मुझसे कहा। दामादजी। मैंने तो कभी भी आपके पास आने की कोशिश नहीं की। उस दिन प्रिया छत पर थी इसलिए मैंने आपको सिर्फ तौलिया दे दिया।

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मैं तो आपके पास नहीं आई थी। आप ही ने मेरा हाथ पकड़ा, लेकिन फिर भी मैंने आपको बता दिया था कि मैं प्रिया नहीं हूं। आपके सिर में दर्द हो रहा था। तब उस समय प्रिया घर पर नहीं थी। मुझे लगा आपको और भी ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ेगी। इसलिए मैंने बाम लगाना शुरू कर दिया, लेकिन तब भी आपने मेरा हाथ पकड़ लिया और आज आप अपने कमरे में ना होकर छत पर क्या कर रहे है?

मैंने आपसे नहीं कहा कि आप मुझे आकर इस तरह से पकड़ लें। जो कुछ भी हुआ, वह सब कुछ अनजाने में हुआ। मैं आपकी सास नहीं, लेकिन सास की जगह हूं। दामाद जी, मुझे हर जगह बस तुम ही नजर आते हो। पता नहीं, मुझे क्या हो गया है आपने जब मेरा हाथ पकड़ा, तो मैं पूरी रात सो नहीं पाई और अपनी उँगलियों से ही मुझे अपनी पाँच सालों से प्यासी चूत की गर्मी बुझानी पड़ी।

दामाद जी जब भी मैं आपको देखती हूं तो मुझे कुछ कुछ होने लगता है। इतना कहकर उन्होंने मुझे होठों पर किस कर दिया, मैं तो पहले से ही रोमैंटिक था उनके किस करने के बाद और ज्यादा रोमेंटिक हो गया, जिससे मेरा लंड खड़ा हो गया और उसे एक छेद की तालब होने लगी और मैंने भी उनको किस करना शुरू कर दिया।

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अब हम दोनों गरम हो गए थे। मैंने छत के ऊपर ही उनको चोद डाला और उनकी पांच सालों की गर्मी को शांत किया, जिससे मेरी सास बहुत खुश हुई और उन्होंने कहा, एक बार और मेरी गर्मी को शांत कर दो और मैंने फिर से 15 मिनट तक उनको चोदकर उनकी गर्मी को शांत किया। उनको चोदने में मुझे इतना मजा आया जितना मुझे कभी नहीं आया।

अब मैं हर रोज़ सुबह जल्दी अपनी पत्नी को चोदता हूं और रात को मेरी सास की
चुदाई करता हूँ।

दोस्तो। अगर आपको ऐसी ही हॉट सेक्स कहानियां पढ़ना पसंद है तो नीचे कमेंट करें। धन्यवाद।

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